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Pusa Basmati 1882: कम पानी में भी बंपर पैदावार देगी बासमती की यह किस्म, सूखे की मार झेल रहे …

By July 30, 2026 ⏱️ 1 min read 👁️ 1 views
Pusa Basmati 1882: कम पानी में भी बंपर पैदावार देगी बासमती की यह किस्म, सूखे की मार झेल रहे …

Pusa Basmati 1882: कम पानी में भी बंपर पैदावार देगी बासमती की यह किस्म, सूखे की मार झेल रहे किसानों के लिए बनी उम्मीद। यह जानकारी उपलब्ध स्रोत रिपोर्ट के आधार पर सामने आई है।

उपलब्ध जानकारी को व्यवस्थित कर यह रिपोर्ट पाठकों के लिए सरल और स्पष्ट भाषा में तैयार की गई है।

क्या बदला

फिलहाल यह जानकारी उपलब्ध स्रोत के आधार पर दी जा रही है। आधिकारिक पुष्टि या अतिरिक्त विवरण आने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।

मुख्य बातें

  • This update was detected from ABP Agriculture.
  • Primary reference domain: abplive.com.
  • This story is filed under Agriculture.

अतिरिक्त स्रोत संदर्भ से संकेत मिलता है कि बासमती धान उगाने वाले किसानों के सामने पानी की कमी सबसे बड़ी समस्या बनकर उभर रही है. ऐसे में आईएआरआई पूसा की ओर से विकसित पूसा बासमती 1882 को लेकर किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है. इन बातों को अंतिम प्रकाशन से पहले संपादकीय रूप से सत्यापित करना चाहिए।

स्रोत क्या संकेत दे रहे हैं

Pusa Basmati 1882: देश में के कई हिस्सों में अभी तक मानसून शुरू नहीं हुआ है. ऐसे में मानसून की खेती करने वालों किसानों की चिंता बढ़ गई है. दरअसल,  जलवायु परिवर्तन, अनियमित बारिश और तेजी से गिरते भूजल स्तर ने खासकर बासमती धान खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ा दी है. पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में बासमती क्षेत्र में पानी की कमी के कारण उत्पादन क्षमता पर असर पड़ रहा है. ऐसे समय में कुछ धान की किस्म ऐसी हैं, जो किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर आ रही हैं. चलिए आज हम आपको बताते हैं कि कम पानी में भी कौन सी बासमती किस्म बंपर पैदावार देगी और सूखे की मार झेल रहे किसानों के लिए कौन-कौन सी किस्म उम्मीद बनकर आई है.  पूसा बासमती 1882 किसानों के लिए बनकर आई उम्मीद  बासमती धान उगाने वाले किसानों के सामने पानी की कमी सबसे बड़ी समस्या बनकर उभर रही है. ऐसे में भारतीय किसान अनुसंधान संस्थान पूसा की ओर से विकसित पूसा बासमती 1882 को लेकर किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है. यह भारत की पहली मास व्युत्पन्न सुखा सहनशील बासमती धान किस्म है, जिसे कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है. इस किस्म को 2022 में केंद्रीय कृषि विमोचन समिति से अधिसूचना मिल चुकी है. इसकी खास बात यह है कि यह केवल सूखे की हालत में ही अच्छी पैदावार नहीं देती है, बल्कि ज्यादा उपज देने की क्षमता रखती है. बदलते मौसम और जल संकट के बीच बासमती किसानों के लिए एक अच्छा ऑप्शन माना जा रहा है.  किन राज्यों में की जा सकती है खेती?  पूसा बासमती 1882 को उत्तर और उत्तर पश्चिम भारत की प्रारंभिक बासमती उत्पादक क्षेत्र के लिए विकसित किया गया है. इसकी खेती मुख्य रूप से दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर और पश्चिम उत्तर प्रदेश के बासमती उत्पादक इलाकों में करने की सिफारिश की गई. इन क्षेत्रों में पानी की कमी होने पर भी यह किस्म उत्पादन में सक्षम मानी गई है.  कम समय में भी तैयार होती है फसल  यह खरीफ सीजन की किस्म है और लगभग 135 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. इसकी औसत उपज 46.9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है. जबकि अनुकूल परिस्थितियों में यह 59.7 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन दे सकती है. कम समय में तैयार होने के कारण किसान अगली फसल की बुवाई भी समय पर कर सकते हैं. वहीं पूसा बासमती 1882 को लोकप्रिय पूसा बासमती-1 का उन्नत रूप माना जाता है. वैज्ञानिकों ने इसमें क्यूडीटीवाई 1.1 नामक विशेष क्यूटीएल जीन शामिल किया है, जो पौधों को सूखे की स्थिति में भी मजबूती देता है. यह जीन खासतौर पर उस समय सक्रिय होता है, जब फसल में बलिया बनने लगती है और पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. ऐसे समय में भी यह किस्म उत्पादन बनाए रखने में मदद करती है.  ये भी पढ़ें-How to Grow Pumpkin: अपने फार्महाउस पर भी कर सकते हैं कद्दू की खेती, जान लें उगाने का तरीका रिसर्च में भी मिले अच्छे रिजल्ट  रेन आउट शेल्टर में किए गए प्रशिक्षणों में पूसा बासमती 1882 ने पुरानी वैरायटी की तुलना में काफी अच्छा प्रदर्शन किया. सूखे की स्थिति में जहां पूसा बासमती-1 की उपज लगभग 496 किलोमीटर प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई. वहीं पूसा बासमती 1882 ने करीब 987.5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर का उत्पादन दिया यानि सूखे के दौरान इस किस्म ने लगभग 2 गुना उपज देने की क्षमता दिखाई. वहीं सामान्य सिंचाई वाली परिस्थितियों में भी इसकी उपज जो पूसा बासमती-1 की तुलना में लगभग 10.26 प्रतिशत ज्यादा दर्ज की गई. ये भी पढ़ें-सागवान की खेती से बनें करोड़पति, सरकार दे रही है पूरे 100% तक की भारी सब्सिडी

प्रसंग

फिलहाल उपलब्ध स्रोत सामग्री के अनुसार, यह खबर "Pusa Basmati 1882: कम पानी में भी बंपर पैदावार देगी बासमती की यह किस्म, सूखे की मार झेल रहे किसानों के लिए बनी उम्मीद" विषय से जुड़ी है। शुरुआती जानकारी का सार यह है: Pusa Basmati 1882: देश में के कई हिस्सों में अभी तक मानसून शुरू नहीं हुआ है. ऐसे में मानसून की खेती करने वालों किसानों की चिंता बढ़ गई है. दरअसल,  जलवायु परिवर्तन, अनियमित बारिश और तेजी से गिरते भूजल स्तर ने खासकर बासमती धान खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ा दी है. पंजाब, हरिय

यह क्यों महत्वपूर्ण है

यह अपडेट पाठकों के लिए इसलिए अहम है क्योंकि यह तेजी से बदलती खबर पर शुरुआती संदर्भ देता है।

यह लेख उपलब्ध स्रोत संकेत पर आधारित है। प्रकाशन से पहले महत्वपूर्ण जानकारी की जांच करें।

आगे क्या

NewzQuest इस विषय पर भरोसेमंद स्रोतों से आने वाले नए अपडेट ट्रैक करता रहेगा।

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Arjun Mehta

Arjun Mehta

Journalist and contributor at NewzQuest Media Network.

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