पं. विजयशंकर मेहता के कॉलम: जीवन को सिद्धांतों से जुड़ें तो सब कार्य परिपक्व होगा

हमारी गतिविधियों में ज्यादातर मौकों पर सूझ, बूझ और बोध का अभाव होता है। यह परिश्रम तो हो सकता है, लेकिन पुरुषार्थ नहीं है। यदि अपने कर्म को पुरुषार्थ बनाना है तो सूझ, जिसका संबंध बुद्धि से है; बूझ, जिसका संबंध बुद्धि और समझ दोनों से है और बोध, यानी अनुभूति और आत्मा- ये तीनों बातें भले ही दिखें ना, तब भी कुछ भी नहीं हो सकता।
हमारी गतिविधियों में ज्यादातर मौकों पर सूझ, बूझ और बोध का अभाव होता है। यह परिश्रम तो हो सकता है, लेकिन पुरुषार्थ नहीं है। यदि अपने कर्म को पुरुषार्थ बनाना है तो सूझ, जिसका संबंध बुद्धि से है; बूझ, जिसका संबंध बुद्धि और समझ दोनों से है और बोध, यानी अनुभूति और आत्मा- ये तीनों बातें भले ही दिखें ना, तब भी कुछ भी नहीं हो सकता।
Curated in the public interest from original reporting.
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