धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, जेन-जी की ताकत और राजनीति के लिए बड़ा संदेश
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भारतीय लोकतंत्र ने एक बार फिर यह साबित किया है कि जनता की आवाज यदि संगठित, शांतिपूर्ण और निरंतर हो तो वह सबसे बड़ी सत्ता को भी आत्मसंवाद के लिए विवश कर सकती है?
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