अर्घ्य सेनगुप्ता और स्वप्निल त्रिपाठी का कॉलम: जिनके शब्दों का प्रभाव अधिक, उन्हें ज्यादा सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि बोले हुए यानि लिखे हुए शब्दों का दुष्परिणाम भी संभव है।

आज जब सी पी नई पीढ़ी की राजनीतिक आवाज बनकर उभरी है, तब यह याद करना आवश्यक है कि इसकी शुरुआत आखिर हुई कहां से। किसी चुनावी घोषणा-पत्र से नहीं, किसी रैली से नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट की एक सुनवाई के दौरान सीजेएसी की एक टिप्पणी से?
Curated in the public interest from original reporting.
Read full story at Dainik Bhaskar →
Discover more from Newz Quest
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
[…] Read in English […]