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Explained: टीचर्स की बेरहमी बचने का आसान रास्ता मौत! आजकल स्टूडेंट्स जान देने पर क्यों तुले, कैसे जानें आपका बच्चा ऐसा तो नहीं?
भारत में स्कूलों को बच्चों का दूसरा घर कहा जाता है. लेकिन पिछले कुछ महीनों में कई ऐसी दिल दहला देने वाली घटनाएं सामने आई हैं, जहां टीचरों की सख्ती, डांट-फटकार या मानसिक प्रताड़ना ने बच्चों को इतना तोड़ दिया कि उन्होंने अपनी जान ले ली. ये सिर्फ एक-दो मामले नहीं हैं, बल्कि एक पैटर्न बनता जा रहा है. फिर चाहे वो चौथी क्लास की अमायरा हो, जिसने स्कूल की बालकनी से कूद कर जान दे दी या फिर 16 साल का शौर्य, जिसने मेट्रो के सामने कूदकर खुदकुशी कर ली. ABP न्यूज के मॉर्निंग एक्सप्लेनर में समझते हैं कि बच्चे अपनी जान देने पर क्यों तुले हैं, कैसे टीचरों की बेरहमी काल बन रही है और अपने बच्चे की हिफाजत कैसे करें… सवाल 1- भारत में पिछले 6 महीनों से बच्चे अपनी जान कैसे लिए जा रहे हैं?जवाब- आजकल बच्चे खुद को इतना अकेला और बेबस महसूस कर रहे हैं
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