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Updated 15 फ़रवरी 2026 7:47 अपराह्न
भारत की डिजिटल पेमेंट व्यवस्था एक नए दौर में प्रवेश करने जा रही है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा UPI (Unified Payments Interface) नियमों में बदलाव 15 सितंबर 2025 से लागू हो जाएंगे।
ये बदलाव खासकर उन लोगों को राहत देंगे जो बड़े ट्रांजैक्शन करते हैं, जैसे शेयर मार्केट निवेश, बीमा प्रीमियम, लोन EMI, क्रेडिट कार्ड पेमेंट और ट्रैवल बुकिंग।
क्या बदल रहा है?
अब तक UPI के जरिए बड़े अमाउंट के ट्रांजैक्शन पर कई बार लिमिटेशन होती थी। लेकिन नए नियमों के बाद Person-to-Merchant (P2M) ट्रांजैक्शन की लिमिट बढ़ा दी गई है। इसका मतलब है कि जब आप वेरिफाइड मर्चेंट को पेमेंट करेंगे, तो एक बार में ज्यादा अमाउंट ट्रांसफर कर सकेंगे।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि Person-to-Person (P2P) ट्रांजैक्शन की डेली लिमिट अभी भी ₹1 लाख प्रति दिन ही रहेगी।
बदलाव क्यों ज़रूरी थे?
पहले बड़े पेमेंट्स करने के लिए यूजर्स को कई हिस्सों में ट्रांजैक्शन करना पड़ता था। इससे न केवल समय बर्बाद होता था बल्कि पेमेंट फेलियर का रिस्क भी बढ़ता था। नई लिमिट्स इस झंझट को खत्म कर देंगी और डिजिटल पेमेंट को और आसान तथा सुरक्षित बनाएंगी।
नई लिमिट्स की झलक
NPCI ने अलग-अलग कैटेगरी के हिसाब से नई पर-ट्रांजैक्शन और डेली लिमिट तय की है। फिलहाल केवल वेरिफाइड मर्चेंट्स पर यह लागू होंगी।
श्रेणी पुरानी पर-ट्रांजैक्शन लिमिट नई पर-ट्रांजैक्शन लिमिट डेली लिमिट (24 घंटे में)
कैपिटल मार्केट निवेश और बीमा ₹2 लाख ₹5 लाख ₹10 लाख
(अन्य कैटेगरी का विवरण आने वाले दिनों में NPCI द्वारा साझा किया जाएगा।)
किन यूजर्स पर होगा असर?
PhonePe, Paytm, Google Pay (GPay) जैसे ऐप्स के यूजर्स को सीधा असर महसूस होगा क्योंकि ये पूरी तरह UPI पर आधारित हैं।
बैंकों को अपनी सुरक्षा पॉलिसी के अनुसार लिमिट को कम-ज़्यादा करने की स्वतंत्रता होगी।
सभी पेमेंट ऐप्स और बैंकों के लिए 15 सितंबर तक अपने सिस्टम को अपडेट करना अनिवार्य है।
NewzQuest सुझाव
इस बदलाव का लाभ उठाने के लिए अपने पेमेंट ऐप को समय पर अपडेट कर लें। साथ ही, अपने बैंक की UPI लिमिट पॉलिसी को जरूर चेक करें, क्योंकि बैंकिंग पार्टनर अपनी सुरक्षा नीतियों के अनुसार लिमिट तय कर सकता है।
आने वाले समय में डिजिटल इंडिया की दिशा में यह कदम बेहद अहम साबित होगा।
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@Vanshika
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