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पेपर लीक के 45 मामले, सजा सिर्फ 2 में:यूपी के 2 आरोपी MLA बीजेपी के साथ गठबंधन में; क्या फास…

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पेपर लीक के 45 मामले, सजा सिर्फ 2 में:यूपी के 2 आरोपी MLA बीजेपी के साथ गठबंधन में; क्या फास…

23 जुलाई की सुबह पीएम मोदी ने X पर लिखा- ‘पेपर लीक के दोषियों को सजा देने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स बनेंगे।' देर रात एक वीडियो मैसेज में भी कहा- ‘फास्ट-ट्रैक कोर्ट का प्रपोजल 24 जुलाई की कैबिनेट बैठक में रखेंगे। अगले सप

पेपर लीक के 45 मामले, सजा सिर्फ 2 में:यूपी के 2 आरोपी MLA बीजेपी के साथ गठबंधन में; क्या फास्ट-ट्रैक कोर्ट से सॉल्यूशन होगा। यह घटनाक्रम फिलहाल सुर्खियों में है।

उपलब्ध जानकारी के आधार पर पूरी घटना को सिलसिलेवार ढंग से यहां समझाया जा रहा है।

क्या बदला

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्थिति सामने रखी जा रही है। अधिक विवरण मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।

मुख्य बातें

  • Main development: पेपर लीक के 45 मामले, सजा सिर्फ 2 में:यूपी के 2 आरोपी MLA बीजेपी के साथ गठबंधन में; क्या फास्ट-ट्रैक कोर्ट से सॉल्यूशन होगा
  • Filed under Investigative.

इस बीच मिली अतिरिक्त जानकारी के अनुसार, PM Narendra Modi NEET Paper Leak Fast-Track Court Decision Reality In India Analysis Explained; Follow CJP Protest, Anti-Paper Leak Law, Jantar Mantar Protest, Cockroach Janta Party Latest News, Reports On Dainik Bhaskar.क्या फास्ट ट्रैक को

अब तक क्या सामने आया है

23 जुलाई की सुबह पीएम मोदी ने X पर लिखा- ‘पेपर लीक के दोषियों को सजा देने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स बनेंगे।' देर रात एक वीडियो मैसेज में भी कहा- ‘फास्ट-ट्रैक कोर्ट का प्रपोजल 24 जुलाई की कैबिनेट बैठक में रखेंगे। अगले सप्ताह संसद में इससे जुड़ा बिल पास कराने की कोशिश की जाएगी।’ इधर दिल्ली हाई कोर्ट ने पेपर लीक के मामले देखने के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट भी बना दी। तो क्या अब फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने से सारी दिक्कतें दूर हो जाएंगी; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… सवाल-1: एग्जाम में गड़बड़ी के मामलों में अब तक कितने लोगों को सजा हुई है? जवाब: 2002 से 2025 तक 45 बड़े एग्जाम में पेपर लीक हुआ। इन सब में 1-1 लाख या उससे ज्यादा बच्चे बैठे थे। अब तक सिर्फ 2 मामलों में सजा सुनाई गई। 27 एग्जाम नौकरियों में भर्ती के थे, बाकी 18 कॉलेज, यूनिवर्सिटीज के एंट्रेंस और स्कूलों के बोर्ड एग्जाम थे। 1658 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 925 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुईं। 2 मामलों में 32 लोग बरी हुए। 43 लोग अभी सुनवाई के दौरान जेल में हैं। 2 मामलों में 18 लोगों को दोषी ठहराया गया। ये सारी जानकारियां इंडियन एक्सप्रेस की इन्वेस्टिगेशन में सामने आई हैं। जिन दो मामलों में दोषी ठहराए गए, वो रेलवे भर्ती बोर्ड से जुड़े हैं… 1. 2002 में असिस्टेंट स्टेशन मास्टर भर्ती का एग्जाम पेपर लीक के चलते रद्द हो गया। 21 जुलाई 2025 को अहमदाबाद की CBI स्पेशल कोर्ट ने 7 रेलवे ऑफिसर्स और एक RPF कॉन्स्टेबल को दोषी ठहराया। सभी को 5 साल जेल और 5 लाख रुपए जुर्माने की सजा हुई। फिलहाल सभी जमानत पर हैं। मामला अब गुजरात हाई कोर्ट में चल रहा है। 2. 2010 में असिस्टेंट लोको पायलट और असिस्टेंट स्टेशन मास्टर की पोस्ट के लिए 6 और 13 जून को हुए एग्जाम पेपर लीक के चलते रद्द हो गए। 30 जनवरी, 2024 को हैदराबाद की CBI कोर्ट ने RRB-मुंबई के अध्यक्ष रहे सतेंद्र मोहन शर्मा, उनके बेटे और 8 अन्य लोगों को 5 साल जेल और 7.87 लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। शर्मा को 2 फरवरी, 2024 को तेलंगाना हाई कोर्ट से जमानत मिल गई। सवाल-2: NEET 2026 के मामले में अब तक क्या हुआ है? जवाब: 3 मई 2026 को हुआ NEET-UG एग्जाम पेपर लीक के खुलासे के बाद 12 मई को रद्द कर दिया गया। अभी CBI, राजस्थान SOG और राज्यों की पुलिस जांच कर रही हैं। 13 आरोपी गिरफ्तार हुए। इसमें NTA की पेपर-सेटिंग कमेटी से जुड़े दो एक्सपर्ट भी हैं- पुणे की बायोलॉजी की लेक्चरर मनीषा गुरुनाथ मंधारे और केमिस्ट्री के प्रोफेसर पी. वी. कुलकर्णी। एग्जाम करवाने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी, NTA ने 21 जून को कड़ी सुरक्षा में दोबारा एग्जाम करवाया। इसका नतीजा भी आ गया है। पेपर लीक में दिल्ली का राउज एवेन्यू कोर्ट सुनवाई कर रहा है। सभी 13 आरोपियों की ज्यूडिशियल कस्टडी 24 जुलाई तक बढ़ा दी गई है। CBI ने अभी तक चार्जशीट दाखिल नहीं की है और कहा है कि अभी कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। 24 जुलाई को कोर्ट में आरोपियों की हिरासत बढ़ाए जाने पर सुनवाई होनी है। सवाल-3: आखिर पेपर लीक रोकने का कानून और इसकी खामियां क्या हैं? जवाब: जून 2024 तक पेपर लीक के लिए कोई एक सेंट्रल कानून नहीं था। धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी के लिए IPC की 420, 120B और 467-471 जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज होता था। इनमें जमानत की कोई सख्त शर्तें नहीं हैं। हालांकि कुछ राज्यों ने अलग से नकल-विरोधी भी कानून बनाए, मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट भी शामिल किया। उत्तर प्रदेश में कुछ मामलों में गैंगस्टर एक्ट भी लगाया गया। ये कानून काफी नहीं थे, 2024 में NEET-UG और UGC के एग्जाम में धांधली के बाद, 21 जून 2024 को केंद्र सरकार ने पेपर लीक के खिलाफ नया कानून लागू किया। इसका नाम है- सार्वजानिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम। इस कानून के मुताबिक, पेपर लीक करना, इसमें मदद करना, गलत तरीके से OMR शीट हासिल करना, नकल करवाना, एग्जाम के लिए कंप्यूटर नेटवर्क वगैरह से छेड़छाड़, एग्जाम से जुड़ी फर्जी वेबसाइट बनाने या परीक्षक को धमकी जैसे कामों को सजा के दायरे लाया गया है। ये सभी अपराध गैर-जमानती हैं, जिनमें दो कैटेगरी में सजा का प्रावधान है- सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता कहते हैं कि सिर्फ कानून बना देना काफी नहीं है। कानूनी प्रक्रिया, कोर्ट में सुनवाई के दौरान लूपहोल्स का फायदा उठाकर अपराधी बच निकलते हैं। इसके कुछ उदाहरण देखिए… 2006: रेलवे पेपर लीक, यूपी के 2 विधायक आरोपी 2015: UPPSC प्री एग्जाम, अब तक जांच अधूरी 2016: यूपी PSC, RO/ARO भर्ती, क्लोजर रिपोर्ट पर कोई सुनवाई नहीं 2016: कर्नाटक PUC, सभी आरोपी बरी 2021: राजस्थान सब-इंस्पेक्टर भर्ती, अधिकारी को जमानत 2024: NEET-UG, CBI कोर्ट में सुनवाई जारी सवाल-4: क्या फास्ट ट्रैक कोर्ट बनने से पेपर लीक की दिक्कतें दूर हो जाएंगी? जवाब: बहुत मुश्किल है, क्योंकि इसमें 3 बड़ी अड़चनें हैं… 1. फास्ट ट्रैक कोर्ट पर केंद्र सरकार का सीधा कंट्रोल नहीं फास्ट ट्रैक कोर्ट्स, यानी FTCs को कंट्रोल करने वाला कोई केंद्रीय कानून नहीं है। इन पर राज्य सरकारों का नियंत्रण है। 21 मार्च 2025 को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने कहा- ‘FTCs और उनका कामकाज राज्य और UTs और राज्यों के हाई कोर्ट्स के अधीन है।’ आगे कहा गया, ‘संविधान के आर्टिकल 233 के तहत, डिस्ट्रिक्ट, निचली कोर्ट्स और FTCs में जजों की नियुक्ति राज्य के हाई कोर्ट की सिफारिश और राज्य के गवर्नर के अधीन है। इस प्रक्रिया में केंद्र सरकार की कोई सीधी भूमिका नहीं है।’ 2. हर मामला तेजी से निपटाना मुश्किल मार्च 2026 में सरकार ने लोकसभा में कहा, ‘इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी, मुकदमों की मुश्किलें, जांच, सबूत का टाइप और मुकदमों से जुड़े स्टेकहोल्डर्स जैसे- बार एसोसिएशन, जांच एजेंसी और गवाह वगैरह पर निर्भर करता है कि मुकदमे में कितनी देर लगेगी। 3. जल्दबाजी से गलत फैसले का खतरा सुप्रीम कोर्ट की चिंता रही है कि किसी मामले में तेजी से फैसला देने के चलते किसी आरोपी के साथ अन्याय न हो जाए। 1952 में सुप्रीम कोर्ट ने एक कानून रद्द किया था। इसके जरिए सरकार ने स्पेशल कोर्ट्स को तेजी से सुनवाई के लिए अपनी मर्जी से मुकदमे चुनने की छूट दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा- 'तेजी शब्द खुद में बहुत अस्पष्ट और भ्रामक पैरामीटर है। तेजी से सुनवाई के लिए मामलों को लॉजिकली चुना जाना चाहिए- जैसे मामले के पीड़ितों की स्थिति वगैरह देखते हुए। 2002 में भी सुप्रीम कोर्ट के 7 जजों की संविधान पीठ ने भी एक ऐतिहासिक फैसले में कहा- 'आपराधिक कार्यवाही के निपटारे के लिए कोई डेडलाइन तय करना न सही है, न व्यावहारिक है और न ही न्यायिक तौर पर स्वीकार्य है। महज एक तय समय बीत जाने के चलते कोर्ट मुकदमे को खत्म करने के लिए बाध्य नहीं है। ऐसी सख्त टाइमलाइन तय करने की न्यायिक अनुमति भी नहीं है।' सुप्रीम कोर्ट में वकील विराग गुप्ता कहते हैं, POCSO, ड्रग्स एक्ट और दूसरे गंभीर मामलों में भी जिन फास्ट ट्रैक कोर्ट से जल्द न्याय देने की बात की गई, वो भी व्यावहारिक तौर पर सफल नहीं है। नए क्रिमिनल कानूनों में भी 3 साल के भीतर न्याय की बात है, लेकिन जिला अदालतों में ही सबसे ज्यादा पेंडिंग मामले हैं।’ सवाल-5: इससे पहले जो फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए, वो कैसा काम कर रहे? जवाब: देश में अभी 2 तरह के फास्ट ट्रैक कोर्ट हैं- 1. फास्ट ट्रैक कोर्ट, FTC 2. फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट, FTSC भारतीय न्याय संहिता, यानी BNS में सिफारिश है कि मुकदमों का निपटारा 2 साल और यौन अपराधों का निपटारा 2 महीने के अंदर होना चाहिए। वहीं FTSC योजना के तहत टारगेट है कि ये हर 3 महीने में 42 मुकदमों के हिसाब से सालाना 165 मामलों का निपटारा करें। हालांकि तेजी से काम करने के बावजूद फास्ट ट्रैक कोर्ट जरूरत भर मुकदमों की सुनवाई नहीं कर पा रहे… ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा अब तक क्यों नहीं हुआ, 5 पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स से समझिए; क्या आगे भी नहीं हटाए जाएंगे जंतर-मंतर पर 33 दिन से कॉकरोच जनता पार्टी का अनशन, सोनम वांगचुक की 25 दिनों की भूख हड़ताल, पीएम आवास के बाहर राहुल गांधी का धरना, संसद में रोज गूंजता हंगामा और अब देश के सभी जिलों में प्रदर्शन का आह्वान। सभी की एक ही मांग है- शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो। पूरी खबर पढ़ें…

प्रसंग

यह खबर "पेपर लीक के 45 मामले, सजा सिर्फ 2 में:यूपी के 2 आरोपी MLA बीजेपी के साथ गठबंधन में; क्या फास्ट-ट्रैक कोर्ट से सॉल्यूशन होगा" से जुड़ी है। अब तक जो जानकारी सामने आई है, उसका सार है: 23 जुलाई की सुबह पीएम मोदी ने X पर लिखा- ‘पेपर लीक के दोषियों को सजा देने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स बनेंगे।' देर रात एक वीडियो मैसेज में भी कहा- ‘फास्ट-ट्रैक कोर्ट का प्रपोजल 24 जुलाई की कैबिनेट बैठक में रखेंगे। अगले सप्ताह संसद में इससे जुड़ा बिल पास कराने की कोशिश की जाएगी।’ इ

ऐसी खबरों में शुरुआती अपडेट और अंतिम तस्वीर के बीच अक्सर कुछ अंतर होता है। पाठकों के लिए मुख्य घटना, उसका असर और आगे आने वाले अपडेट को अलग-अलग समझना मददगार रहता है।

अपराध, अदालत, राजनीति, स्वास्थ्य या वित्त जैसे संवेदनशील विषयों में स्थिति समय के साथ बदल सकती है, इसलिए इस पर आगे भी अपडेट दिया जाएगा।

पाठकों पर असर

पाठकों के लिए यह खबर इसलिए अहम है क्योंकि यह तेजी से बदलते घटनाक्रम का संक्षिप्त, स्रोत-आधारित और साफ संदर्भ देती है।

NewzQuest दृष्टिकोण

NewzQuest की नजर में यह एक शुरुआती लेकिन महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, जिस पर आने वाले समय में और स्पष्टता आने की उम्मीद है।

आगे क्या देखना है

  • इस मुद्दे पर आने वाला अगला आधिकारिक बयान।
  • इसका आम लोगों और स्थानीय समुदाय पर पड़ने वाला असर।
  • आने वाले दिनों में सामने आने वाले नए घटनाक्रम।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

यह अपडेट पाठकों के लिए इसलिए अहम है क्योंकि यह तेजी से बदलती खबर पर शुरुआती संदर्भ देता है।

NewzQuest सटीक और जिम्मेदार रिपोर्टिंग के लिए प्रतिबद्ध है। अगर आपको इस खबर में कोई त्रुटि नजर आती है, तो कृपया हमें सूचित करें।

आगे क्या

NewzQuest इस विषय पर आने वाले हर नए अपडेट को ट्रैक करता रहेगा।

Fatima Khan

लेखक के बारे में

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