
Updated 9 जुलाई 2026 2:02 पूर्वाह्न
{
"title": "पाकिस्तान में 125‑साल पुराना गुरुद्वारा ढह गया, भारत ने कार्रवाई की मांग",
"excerpt": "पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक ऐतिहासिक गुरुद्वारे के हिस्से को एक स्थानीय व्यापारी ने गिरा दिया, जिससे सिख अल्पसंख्यक ने विरोध प्रदर्शन किया। भारत ने इस घटना पर कड़ी निंदा करते हुए ज़िम्मेदारों से कार्रवाई की मांग की, जबकि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस पर अलग दृष्टिकोण रखा।",
"body_html": "<h2>घटना का पृष्ठभूमि</h2>n<p>पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के फ़ारूकाबाद जिले में स्थित एक 125‑साल पुराना गुरुद्वारा, जो लाहौर के पास है, पर एक स्थानीय व्यापारी ने हिस्से को गिरा दिया। यह गुरुद्वारा सिख समुदाय के लिए ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखता था। घटना के बाद सिख अल्पसंख्यक ने विरोध प्रदर्शन किया, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया।</p>nn<h2>भारत की प्रतिक्रिया</h2>n<p>भारत सरकार ने बुधवार को इस घटना पर कड़ी निंदा की और ज़िम्मेदार व्यक्तियों से कार्रवाई की मांग की। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस मामले को गंभीरता से लिया और पाकिस्तान पर अपनी शिकायत दर्ज कराई। भारत की यह मांग इस बात पर आधारित है कि धार्मिक स्थल को बिना अनुमति के नष्ट करना न केवल सांस्कृतिक विरासत का अपमान है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का उल्लंघन भी है।</p>nn<h2>पाकिस्तानी सरकार का जवाब</h2>n<p>पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने गुरुवार को अपनी साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में इस मुद्दे पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह गुरुद्वारा अब धार्मिक उपयोग के लिए नहीं था क्योंकि क्षेत्र में सिख आबादी नहीं रहती। संपत्ति निजी किरायेदारों के हाथ में है और यह संरचना पुरानी तथा जर्जर हो चुकी थी। आसपास के लोगों को डर था कि आने वाले बरसात के मौसम में यह इमारत ढह सकती है।</p>nn<h2>सिख समुदाय पर प्रभाव</h2>n<p>सिख अल्पसंख्यक के लिए यह घटना एक बड़ा आघात है। गुरुद्वारे का ढहना न केवल धार्मिक स्थल के विनाश को दर्शाता है, बल्कि यह सिखों की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक स्मृति पर भी गहरा असर डालता है। कई सिखों का मानना है कि ऐसे कार्यों से उनके अधिकारों और सम्मान को कमतर किया जा रहा है।</p>nn<h2>भविष्य की चुनौतियाँ</h2>n<p>इस घटना से कई चुनौतियाँ सामने आती हैं:</p>n<ul>n<li>धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए कानूनी ढाँचे को मजबूत करना।</li>n<li>सिख अल्पसंख्यक के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करना।</li>n<li>भारत-पाकिस्तान के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर संवाद को बढ़ावा देना।</li>n<li>सामुदायिक सहिष्णुता और समावेशिता को बढ़ावा देने के लिए शैक्षिक कार्यक्रमों की शुरुआत।</li>n<li>सार्वजनिक जागरूकता अभियान चलाकर धार्मिक स्थलों के ऐतिहासिक महत्व को उजागर करना।</li>n</ul>
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