
Updated 18 जून 2026 6:32 अपराह्न
परिचय
हर महीने होने वाली माहवारी का पैटर्न महिलाओं के स्वास्थ्य का एक अहम संकेत होता है। अगर यह नियमित नहीं है, तो यह सिर्फ प्रजनन संबंधी समस्या नहीं बल्कि कई गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकता है। हालिया चिकित्सीय रिपोर्ट्स ने इस ओर ध्यान आकर्षित किया है कि अनियमित माहवारी को नजरअंदाज करना हृदय रोग, कैंसर और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ा सकता है।
पीसीओडी क्या है
पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिसऑर्डर (पीसीओडी) एक ऐसी स्थिति है जिसमें अंडाशय में कई छोटे-छोटे सिस्टस बन जाते हैं। यह हार्मोनल असंतुलन, अनियमित माहवारी, एक्सेसिव हेयर ग्रोथ और एक्ने जैसी समस्याओं का कारण बनता है। पीसीओडी केवल गर्भधारण में बाधा नहीं डालता, बल्कि शरीर के मेटाबॉलिक और कार्डियोवस्कुलर सिस्टम को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
अनियमित माहवारी का महत्व
माहवारी का अनियमित होना कई कारणों से हो सकता है – तनाव, वजन में उतार-चढ़ाव, थायरॉइड समस्या या फिर underlying hormonal disorders. जब माहवारी अनियमित रहती है, तो यह बताती है कि शरीर का हॉर्मोनल संतुलन बिगड़ रहा है. इस स्थिति को अक्सर पीसीओडी से जोड़ा जाता है, लेकिन यह हमेशा स्पष्ट नहीं होता। फिर भी, इसे अनदेखा करना खतरनाक हो सकता है।
हृदय रोग और कैंसर का जोखिम
विभिन्न शोधों ने दिखाया है कि पीसीओडी से ग्रसित महिलाओं में हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और एंडोमेट्रियल (गर्भाशय) कैंसर का जोखिम अधिक होता है। ये जोखिम इसलिए बढ़ता है क्योंकि पीसीओडी:
- इंसुलिन प्रतिरोध को बढ़ाता है, जिससे मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है।
- रक्तचolesterol के स्तर को असंतुलित करता है, जिससे हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।
- एंडोजेनस एस्ट्रोजन के उत्पादन को बदलता है, जिससे एंडोमेट्रियल कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
इन सभी कारकों को देखते हुए, डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अनियमित माहवारी को नजरअंदाज करना स्वास्थ्य के लिए गंभीर परिणामों का कारण बन सकता है।
डॉक्टरों की चेतावनी
केजीएमयू (किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी) के हृदय रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. ऋषि सेठी बताते हैं कि उनके ओपीडी में हर महीने पाँच से छह मरीज ऐसे आते हैं, जहाँ हृदय संबंधी समस्याएँ पीसीओडी से जुड़ी पाई जाती हैं. इनमें 30-40 वर्ष की महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है. इसी तरह, डॉ. अंजू अग्रवाल, जो कि केजीएमयू के गायनोकोलॉजी एवं स्त्री रोग विभाग की प्रमुख हैं, बताती हैं कि ओपीडी में कई ऐसी महिलाएँ आती हैं, जिन्हें अनियमित माहवारी की शिकायत रहती है और बाद में उन्हें हृदय या कैंसर संबंधी गंभीर बीमारियों का निदान होता है.
केस स्टडी: केजीएमयू के आंकड़े
केGIJHU के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में कार्डियोवस्कुलर ओPD में आने वाले 30-40 वर्ष की लगभग 35% महिलाओं में पीसीओडी के लक्षण पाए गए. इनमें से लगभग 12% को हृदय संबंधी जटिलताओं का निदान हुआ. यह डेटा स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि अनियमित माहवारी केवल एक ‘सामान्य’ समस्या नहीं, बल्कि एक संभावित स्वास्थ्य खतरे का संकेत है।
क्या करें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि अगर कोई महिला को माहवारी में अनियमितता, वजन बढ़ना, एक्सेसिव हेयर ग्रोथ या एक्ने जैसी समस्याएँ हो रही हैं, तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. शुरुआती निदान और उचित इलाज से इन जोखिमों को कम किया जा सकता है. कुछ महत्वपूर्ण कदम इस प्रकार हैं:
- रक्त परीक्षणों के माध्यम से हार्मोनल स्तर की जाँच करें।
- इंसुलिन प्रतिरोध को नियंत्रित करने के लिए आहार और व्यायाम पर ध्यान दें।
- नियमित स्वास्थ्य जाँच और कार्डियोवस्कुलर स्क्रीनिंग करवाएँ।
- अगर डॉक्टर ने सलाह दी हो तो दवा या हॉर्मोनल थेरेपी लें।
समय पर उचित कदम उठाने से न केवल fertility issues को कम किया जा सकता है, बल्कि हृदय रोग और कैंसर के जोखिम को भी घटाया जा सकता है।
निष्कर्ष
अनियमित माहवारी को नजरअंदाज करना अब सिर्फ एक ‘सामान्य’ समस्या नहीं रह गई है। यह हार्मोनल और मेटाबॉलिक बदलावों का संकेत हो सकता है, जो आगे चलकर हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और गर्भाशय कैंसर जैसे गंभीर रोगों का कारण बन सकता है। इसलिए, हर महिला को अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए, और किसी भी अनियमितता को गंभीरता से लेना चाहिए। नियमित चेक‑अप, उचित चिकित्सीय सलाह और जीवनशैली में सुधार के जरिए इन जोखिमों को कमाया जा सकता है।
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