Friday, July 31, 2026
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Fuel Shortage: जिस सस्ते रूसी तेल पर लड़ रहे भारत-अमेरिका, वहां ही हो गई भारी किल्लत, अब कैस…

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Fuel Shortage: जिस सस्ते रूसी तेल पर लड़ रहे भारत-अमेरिका, वहां ही हो गई भारी किल्लत, अब कैस…

Fuel Shortage: बीते कुछ महीनों में भारत ने तेल और गैस की किल्लत देखी. यूएस और ईरान के युद्ध की वजह से क्रूड ऑइल की आवाजाही प्रभावित हुई, जिसकी वजह से पेट्रोल- डीजल के दाम भी बढ़े. जिसके बाद भारत सस्ते रूसी तेल के ऊपर पूर

Fuel Shortage: जिस सस्ते रूसी तेल पर लड़ रहे भारत-अमेरिका, वहां ही हो गई भारी किल्लत, अब कैसे सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल। यह जानकारी उपलब्ध स्रोत रिपोर्ट के आधार पर सामने आई है।

उपलब्ध जानकारी को व्यवस्थित कर यह रिपोर्ट पाठकों के लिए सरल और स्पष्ट भाषा में तैयार की गई है।

क्या बदला

फिलहाल यह जानकारी उपलब्ध स्रोत के आधार पर दी जा रही है। आधिकारिक पुष्टि या अतिरिक्त विवरण आने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।

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मुख्य बातें

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अतिरिक्त स्रोत संदर्भ से संकेत मिलता है कि Fuel Shortage: रूस के सस्ते तेल के लिए भारत और अमेरिका के बीच लड़ाई चल रह है. लेकिन अब खबरें हैं कि यहां पर भी तेल की किल्लत हो गई है. इन बातों को अंतिम प्रकाशन से पहले संपादकीय रूप से सत्यापित करना चाहिए।

स्रोत क्या संकेत दे रहे हैं

Fuel Shortage: बीते कुछ महीनों में भारत ने तेल और गैस की किल्लत देखी. यूएस और ईरान के युद्ध की वजह से क्रूड ऑइल की आवाजाही प्रभावित हुई, जिसकी वजह से पेट्रोल- डीजल के दाम भी बढ़े. जिसके बाद भारत सस्ते रूसी तेल के ऊपर पूरी तरह से डिपेंडेंट होने की सोच रहा था. लेकिन अब खबरें हैं कि रूस में भी तेल की किल्लत शुरू हो गई है. ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि खुद रूप के राष्ट्रपति ने कहा बताया है. रूस में ईंधन की किल्लतदरअसल हाल ही में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कुबूल किया है कि यूक्रेन के लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों की वजह से यहां ईंधन की किल्लत होने लगी है. इस बारे में खुद पुतिन ने बात करते हुए बताया है कि, 'अब रूस का ध्यान अपनी हवाई सुरक्षा (एयर डिफेंस) बढ़ाने और खासकर क्रीमिया तक ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर है.' ये भी पढ़ें: Persistent-Nagarro Deal: यूरोप के बाजार पर भारतीय कंपनी का कब्जा! $2.9 बिलियन के इस AI मर्जर के मायने समझिए पुतिन ने आगे कहा, 'पिछले कुछ हफ्तों में यूक्रेन ने रूस की कई तेल रिफाइनरियों और ईंधन भंडारण केंद्रों पर हमला किया है. इससे रूस के कई इलाकों में पेट्रोल-डीजल की कमी हो गई है और पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें लग रही हैं. यूक्रेन ने लंबी दूरी के हमलों को रोकने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन रूस को लगता है कि यूक्रेन ऐसा इसलिए चाहता है क्योंकि रूस के जवाबी हमले उसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं.' इन क्षेत्रों पर कब्जा करने की फिराक में रूसपुतिन ने ये भी कहा कि फिलहाल रूस का लक्ष्य डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिज़्झिया क्षेत्रों पर पूरी तरह कब्जा करना है. जब तक उनका ये लक्ष्य पूरा नहीं होता, तब तक रूस किसी ऐसे शांति समझौते को स्वीकार नहीं करेगा जो उसकी शर्तों के मुताबिक न हो. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका के प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और जैरेड कुशनर जल्द ही फिर से बातचीत शुरू करेंगे. उन्होंने ये भी कहा कि बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको शांति वार्ता में मदद कर सकते हैं. ये भी पढ़ें: हर महीने मिलेंगे 2.8 लाख रुपये, ब्रेकअप कराने का होगा काम; कंपनी ने निकाली अजीबोगरीब वैकेंसी नहीं किए समझौते पर हस्ताक्षरइस बातचीत के दौरान पुतिन ने ये भी बताया कि पिछले साल अलास्का में उनकी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बातचीत के दौरान यूक्रेन युद्ध खत्म करने के कुछ संभावित तरीकों पर चर्चा हुई थी, लेकिन कोई आधिकारिक समझौता या दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं हुए थे. कैसे होगी भारत में पेट्रोल- डीजल की कीमतें कम?वैसे तो ईरान और यूएक के बीच अब युद्धविराम लग गया है, लेकिन ये महज 60 दिन का ही अनुबंध है. ऐसे में 60 दिन के बाद स्थिति दोबारा वैसी ही हो सकती है, जिस वजह से भारत ने रूस को ऐसी स्थिति में सहारे के रूप में देखा था. लेकिन अब जब रूस में भी तेल की किल्लत है तो भारत में पेट्रोल- डीजल की कीमतें कैसे होंगी इस बात पर संशय बना हुआ है. यदि स्थिति नहीं सुधरती है तो तेल के दामें में बढ़ोतरी भी हो सकती है. 

प्रसंग

फिलहाल उपलब्ध स्रोत सामग्री के अनुसार, यह खबर "Fuel Shortage: जिस सस्ते रूसी तेल पर लड़ रहे भारत-अमेरिका, वहां ही हो गई भारी किल्लत, अब कैसे सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल" विषय से जुड़ी है। शुरुआती जानकारी का सार यह है: Fuel Shortage: बीते कुछ महीनों में भारत ने तेल और गैस की किल्लत देखी. यूएस और ईरान के युद्ध की वजह से क्रूड ऑइल की आवाजाही प्रभावित हुई, जिसकी वजह से पेट्रोल- डीजल के दाम भी बढ़े. जिसके बाद भारत सस्ते रूसी तेल के ऊपर पूरी तरह से डिपेंडेंट होने की सोच रहा था. लेकिन अब खबरें हैं कि

यह क्यों महत्वपूर्ण है

बिजनेस खबरों का असर बाजार, उपभोक्ताओं और कंपनियों के फैसलों पर पड़ सकता है।

यह लेख उपलब्ध स्रोत संकेत पर आधारित है। प्रकाशन से पहले महत्वपूर्ण जानकारी की जांच करें।

आगे क्या

NewzQuest इस विषय पर भरोसेमंद स्रोतों से आने वाले नए अपडेट ट्रैक करता रहेगा।

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