Sunday, July 26, 2026
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नाम झुन्नू था, दिव्यांगता के कारण लोग झंडू कहने लगे:अब भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा …

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नाम झुन्नू था, दिव्यांगता के कारण लोग झंडू कहने लगे:अब भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा …

कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा पावरलिफ्टिंग में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले झंडू कुमार के लिए उनकी मां कमला देवी के शब्द सबसे बड़ी प्रेरणा बने। मुकाबले से कुछ देर पहले व्हाट्सऐप कॉल पर मां ने बेटे से कहा, ‘बेटा, जब वहां तक पहुंच ह


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नाम झुन्नू था, दिव्यांगता के कारण लोग झंडू कहने लगे:अब भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा पावरलिफ्टिंग का ब्रॉन्ज जीता। यह घटनाक्रम फिलहाल सुर्खियों में है।

उपलब्ध जानकारी के आधार पर पूरी घटना को सिलसिलेवार ढंग से यहां समझाया जा रहा है।

क्या बदला

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्थिति सामने रखी जा रही है। अधिक विवरण मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।

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मुख्य बातें

  • Main development: नाम झुन्नू था, दिव्यांगता के कारण लोग झंडू कहने लगे:अब भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा पावरलिफ्टिंग का ब्रॉन्ज जीता
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इस बीच मिली अतिरिक्त जानकारी के अनुसार, Commonwealth Games para powerlifter Jhandu Kumar wins medal after mother blessings motivation. कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा पावरलिफ्टिंग में पदक जीतने वाले झंडू कुमार के लिए उनकी मां कमला देवी के शब्द सबसे बड़ी प्रेरणा बने।

अब तक क्या सामने आया है

कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा पावरलिफ्टिंग में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले झंडू कुमार के लिए उनकी मां कमला देवी के शब्द सबसे बड़ी प्रेरणा बने। मुकाबले से कुछ देर पहले व्हाट्सऐप कॉल पर मां ने बेटे से कहा, ‘बेटा, जब वहां तक पहुंच ही गए हो, तो देश का तिरंगा फहरा कर आना। पहला, दूसरा और तीसरा स्थान में से कोई भी स्थान लेकर आना।’ मेडल जीतने के बाद झंडू ने सबसे पहले मां को फोन किया और कहा, ‘तोहनी के आशीर्वाद से जीत गई लो मइया (मां, आपके आशीर्वाद से मेडल जीत गया)।’ बड़े भाई कुंदन कुमार ने बताया कि हम चार भाइयों में झंडू सबसे छोटे हैं। एक भाई का निधन हो चुका है। मुकाबले से पहले शुक्रवार रात करीब 8 बजे झंडू ने घर पर फोन किया था। परिवार के सभी लोगों ने उन्हें "विजयी भव" कहकर आशीर्वाद दिया। इसके बाद उन्होंने मां से बात की। मां ने कहा, ‘जब वहां तक पहुंच गए हो, तो झंडा फहरा कर ही आना और पहला, दूसरा, तीसरा स्थान ले आना।’ मां कमला देवी ने भास्कर से कहा, ‘रात भर जगलीईओ और देखलियो बाबू ने देश का नाम रोशन कईलन।’ (रात भर जागकर उनका मुकाबला देखा। झंडू को देश का नाम रोशन करते देखा।) उन्होंने बताया, 'जीतने के बाद झंडू ने कहा- जीत गईलियो मइया। उससे पहले भी आर्शीवाद लेवे खातिर फोन कईले रहलन। तब हम कहनी कि झंडा फहराकर आना।' नाम को लेकर उन्होंने बताया कि उनका नाम झुन्नू रखा गया था, लेकिन धीरे-धीरे सभी लोग उन्हें झंडू कहने लगे। रात 2 बजे तक जागकर देखा मुकाबला कुंदन कुमार ने बताया कि पूरा परिवार रात 9 बजे तक खाना खा चुका था, ताकि सभी मिलकर झंडू का मुकाबला देख सकें। पहले झंडू ने बताया था कि उनका इवेंट रात 10 बजे होगा, लेकिन मुकाबला रात करीब 2 बजे शुरू हुआ। उन्होंने पहली कोशिश में 180 किलो वजन उठाया तो पूरे परिवार के चेहरे पर मुस्कान आ गई। मां कमला देवी और पिता रामानंद पासवान खुशी से मुस्कुरा रहे थे। इसके बाद झंडू ने 196 किलो वजन उठाया तो घर में तालियां गूंज उठीं। मां-पिता ने पूछा कि क्या हुआ, सभी ताली क्यों बजा रहे हैं? तब परिवार वालों ने बताया कि झंडू ने पदक जीत लिया है। सुबह बाजार पहुंचे तो लोगों ने दी बधाई कुंदन बताते हैं कि सुबह जब वह सब्जी की दुकान जा रहे थे, तब रास्ते में मिलने वाले लोग रोक-रोककर बधाई दे रहे थे। जो लोग पहले उन्हें झंडूवा कहकर बुलाते थे, वही अब कह रहे थे, ‘झंडू जी की जीत पर बधाई।’ लगातार फोन भी आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि झंडू पहले मां-पिता के साथ सब्जी की दुकान पर हाथ बंटाते थे। बाद में उन्होंने जिम जाना शुरू किया और धीरे-धीरे पावरलिफ्टिंग में रुचि बढ़ती गई। परिवार ने कभी उन्हें रोका नहीं, बल्कि हर कदम पर पूरा साथ दिया। पढ़ाई के साथ मां-पिता के काम में भी हाथ बंटाते थे झंडू हरनौत के सबनौह डीह गांव के रहने वाले हैं। चार भाइयों और तीन बहनों में सबसे छोटे हैं। वह दिव्यांग हैं। चार साल की उम्र में उन्हें पोलियो हो गया था, जिससे कमर के नीचे शरीर का एक हिस्सा प्रभावित हो गया। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। मां-पिता हरनौत बाजार में सड़क किनारे आलू-प्याज बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। पूरा परिवार किराए के एक कमरे में रहता है। झंडू पढ़ाई के साथ मां-पिता के काम में भी हाथ बंटाते थे। इसके बावजूद वह खेल के लिए समय निकालते रहे। बेटे का कॉमनवेल्थ तक पहुंचना ही हमारे लिए गर्व की बात : पिता झंडू के पिता रामानंद पासवान कहते हैं, "बेटे का कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए चयन होना ही हमारे लिए गर्व और खुशी की बात थी। झंडू बचपन से ही बहुत होनहार रहा है। वह शारीरिक रूप से दिव्यांग जरूर है, लेकिन उसकी इच्छाशक्ति कभी कमजोर नहीं हुई। उसने हमेशा हौसला बनाए रखा। आज उसी मेहनत के दम पर विदेश तक पहुंच गया। एक पिता के लिए इससे बड़ी खुशी और क्या हो सकती है।" पैरालंपिक पदक विजेता से मिली ट्रेनिंग एक साधारण परिवार के बेटे को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनाने में कई लोगों का योगदान रहा। वर्ष 2019 से कुंदन कुमार पांडे मार्गदर्शक के रूप में लगातार उनके साथ जुड़े रहे। रॉकस्टार जिम के संचालक और ट्रेनर ने भी उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण दिया। बाद में उनका चयन स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र, गांधीनगर (गुजरात) में हुआ। वहां उन्हें पैरालंपिक पदक विजेता राजेंद्र सिंह रहेलू से प्रशिक्षण लेने का अवसर मिला। बिहार पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन के सचिव संदीप कुमार ने भी हर स्तर पर उनका सहयोग किया। सब्जी विक्रेता का बेटा कॉमनवेल्थ तक पहुंचा, यह पूरे देश के लिए गर्व की बात : कोच नालंदा पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन के सचिव और झंडू के कोच कुंदन कुमार पांडे कहते हैं, ‘ह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि नालंदा और हरनौत जैसे छोटे इलाके से निकला खिलाड़ी कॉमनवेल्थ जैसे प्रतिष्ठित मंच तक पहुंचा है। एक सब्जी विक्रेता के बेटे का इस स्तर तक पहुंचना पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। यह विश्व स्तर का ऐसा मंच है, जिसकी तुलना ओलंपिक से की जाती है।’ झंडू मेरे पास 2019 से ट्रेनिंग कर रहा है। वह 4 चाल के थे, तभी उन्हें पोलियो मा दिया था। झंडू बोले- हवा में उड़ने जैसा लग रहा, मेडल जीतना ही लक्ष्य था झंडू कुमार ने मेडल जीतने के बाद एजेंसी से कहा कि उनका पूरा ध्यान भारत के लिए पदक जीतने पर था। कांस्य पदक जीतने के बाद उन्होंने कहा, ‘मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं हवा में उड़ रहा हूं। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में मेरा पहला मेडल है। मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही बात थी कि मेडल जीतना है।’ उन्होंने अपने परिवार, कोच और सभी समर्थकों का आभार जताते हुए कहा, ‘उन सभी ने मुझे अभ्यास करने का मौका दिया और हमेशा साथ दिया। मैं भविष्य में इससे भी बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करूंगा।’ —————————————————- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पहला मेडल:झंडू कुमार को पैरा पावरलिफ्टिंग में ब्रॉन्ज, 190 kg का वजन उठाया; बॉक्सिंग में जादुमणि जीते ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने पहला मेडल जीत लिया है। बिहार के पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने पुरुष हेवीवेट वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया। उन्होंने 190 किलोग्राम की बेस्ट लिफ्ट के साथ 130.9 अंक हासिल किए। पूरी खबर

प्रसंग

यह खबर "नाम झुन्नू था, दिव्यांगता के कारण लोग झंडू कहने लगे:अब भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा पावरलिफ्टिंग का ब्रॉन्ज जीता" से जुड़ी है। अब तक जो जानकारी सामने आई है, उसका सार है: कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा पावरलिफ्टिंग में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले झंडू कुमार के लिए उनकी मां कमला देवी के शब्द सबसे बड़ी प्रेरणा बने। मुकाबले से कुछ देर पहले व्हाट्सऐप कॉल पर मां ने बेटे से कहा, ‘बेटा, जब वहां तक पहुंच ही गए हो, तो देश का तिरंगा फहरा कर आना। पहला, दूसरा और तीसरा

ऐसी खबरों में शुरुआती अपडेट और अंतिम तस्वीर के बीच अक्सर कुछ अंतर होता है। पाठकों के लिए मुख्य घटना, उसका असर और आगे आने वाले अपडेट को अलग-अलग समझना मददगार रहता है।

अपराध, अदालत, राजनीति, स्वास्थ्य या वित्त जैसे संवेदनशील विषयों में स्थिति समय के साथ बदल सकती है, इसलिए इस पर आगे भी अपडेट दिया जाएगा।

खेल खबरों में चयन, फिटनेस, कप्तानी, कार्यक्रम और टीम रणनीति जैसे पहलू तेजी से बदल सकते हैं। इसलिए ड्राफ्ट में तत्काल अपडेट के साथ-साथ आगे की संभावित दिशा भी साफ होनी चाहिए।

पाठकों पर असर

खेल पाठकों के लिए इसका असर टीम चयन, खिलाड़ी भूमिका, टूर्नामेंट रणनीति और आने वाले मुकाबलों की तैयारी से जुड़ सकता है। इसलिए केवल हेडलाइन नहीं, बल्कि स्रोतों में दिख रहे संकेतों को भी समझना जरूरी है।

NewzQuest दृष्टिकोण

NewzQuest की नजर में यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में टीम रणनीति और प्रदर्शन पर असर डाल सकता है, इसलिए इस पर नजर बनाए रखना जरूरी है।

आगे क्या देखना है

  • आधिकारिक टीम या बोर्ड की ओर से आने वाला अगला बयान।
  • आगामी मुकाबलों के कार्यक्रम और तैयारी पर असर।
  • खिलाड़ियों और प्रशंसकों की प्रतिक्रिया।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

खेल से जुड़ी ऐसी खबरें खिलाड़ियों, टूर्नामेंट और प्रशंसकों के लिए सीधे असर वाली होती हैं, इसलिए नए अपडेट पर नजर रखना जरूरी है।

NewzQuest सटीक और जिम्मेदार रिपोर्टिंग के लिए प्रतिबद्ध है। अगर आपको इस खबर में कोई त्रुटि नजर आती है, तो कृपया हमें सूचित करें।

आगे क्या

NewzQuest इस विषय पर आने वाले हर नए अपडेट को ट्रैक करता रहेगा।

Anita Sharma

लेखक के बारे में

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