Tuesday, July 28, 2026
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राजनीति

दावा-सरकार ने प्रधान का मंत्रालय बदलने का ऑफर दिया था:कॉकरोच पार्टी इस्तीफे की मांग पर अड़ी …

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दावा-सरकार ने प्रधान का मंत्रालय बदलने का ऑफर दिया था:कॉकरोच पार्टी इस्तीफे की मांग पर अड़ी …

नीट पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा 25 जुलाई को हुआ। हालांकि, इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस्तीफे से पहले केंद्र सरकार ने छात्रों के प्रदर्शन का नेतृत्व

दावा-सरकार ने प्रधान का मंत्रालय बदलने का ऑफर दिया था:कॉकरोच पार्टी इस्तीफे की मांग पर अड़ी रही, कहा- कोई समझौता नहीं करेंगे। यह घटनाक्रम फिलहाल सुर्खियों में है।

जो भी जानकारी अब तक सामने आई है, उसे स्पष्ट और सरल भाषा में यहां पेश किया जा रहा है।

क्या बदला

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्थिति सामने रखी जा रही है। अधिक विवरण मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।

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मुख्य बातें

  • Main development: दावा-सरकार ने प्रधान का मंत्रालय बदलने का ऑफर दिया था:कॉकरोच पार्टी इस्तीफे की मांग पर अड़ी रही, कहा- कोई समझौता नहीं करेंगे
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इस बीच मिली अतिरिक्त जानकारी के अनुसार, Dharmendra Pradhan Resignation NEET paper leak controversy news. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा 25 जुलाई को हुआ।

अब तक क्या सामने आया है

नीट पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा 25 जुलाई को हुआ। हालांकि, इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस्तीफे से पहले केंद्र सरकार ने छात्रों के प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से एक समझौते की कोशिश की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार चाहती थी कि धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्रालय से हटाकर किसी दूसरे मंत्रालय की जिम्मेदारी दे दी जाए, ताकि वे कैबिनेट में बने रहें। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने CJP के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका से संपर्क किया था। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान सरकार ने पूछा था कि अगर प्रधान का मंत्रालय बदल दिया जाए तो क्या आंदोलन खत्म हो जाएगा। हालांकि, CJP नेताओं ने यह ऑफर ठुकरा दिया। उनका कहना था कि मंत्रालय बदलना नहीं, बल्कि धर्मेंद्र प्रधान का पूरी तरह इस्तीफा ही उनकी मुख्य मांग है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इस्तीफे से 48 घंटे पहले BJP में शुरू हो गई थी इस्तीफे की चर्चा रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत के लिए कोई औपचारिक माध्यम नहीं था। इसी वजह से दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बढ़ता गया और कोई सहमति नहीं बन सकी। बाद में बढ़ते राजनीतिक दबाव, संसद में लगातार हंगामे और छात्रों के आंदोलन के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। रिपोर्ट के अनुसार, इस्तीफे से 48 घंटे पहले भाजपा के भीतर चर्चा शुरू हो गई थी। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना था कि बढ़ते जन आक्रोश और संसद में हंगामे के बीच प्रधान का शिक्षा मंत्री बने रहना मुश्किल हो गया है। प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। कैसे शुरू हुआ CJP का आंदोलन? ऑनलाइन कैंपेन से बनी कॉकरोच जनता पार्टी अभिजीत दीपके ने कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन कैंपेन के रूप में की थी। सोशल मीडिया पर यह अभियान तेजी से वायरल हुआ और बड़ी संख्या में छात्र इससे जुड़ते गए। देखते ही देखते यह ऑनलाइन मुहिम एक संगठित छात्र आंदोलन में बदल गई। CJP ने देशभर में परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू किए। NEET-UG 2026 पेपर लीक के बाद शुरू हुआ विरोध NEET-UG 2026 में पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों के आरोप सामने आने के बाद छात्रों में नाराजगी बढ़ने लगी। इसी मुद्दे पर 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP का पहला बड़ा प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, पेपर लीक की निष्पक्ष जांच और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई। 36 दिन तक चला जंतर-मंतर का धरना दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP का धरना 36 दिन तक चला। इस दौरान हजारों छात्र, अभिभावक और युवा आंदोलन में शामिल हुए। पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी प्रदर्शन में शामिल हुए और भूख हड़ताल पर बैठे। धीरे-धीरे यह आंदोलन सिर्फ NEET तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देशभर में भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग का बड़ा अभियान बन गया। 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने धरना समाप्त करने की घोषणा करते हुए इसे छात्रों की जीत बताया। कभी पेपर लीक के खिलाफ खुद सड़क पर उतरे थे धर्मेंद्र 1997 में पेपर लीक प्रदर्शन में धर्मेंद्र प्रधान भी शामिल हुए थे। उनको बुरी तरह पीटा गया था। चेहरे पर चोटें भी आईं थीं। -फोटो क्रेडिट:TNIE 29 साल पहले पेपर लीक मुद्दे पर धर्मेन्द्र प्रधान ने भी विरोध प्रदर्शन किया था। प्रधान के सहयोगी रहे प्रशांत राउत ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि 1997 में ओडिशा में एक पेपर लीक हुआ था, तब प्रधान ने प्रदर्शन किया था। इसमें करीब 1,500 छात्र शामिल हुए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया था। धर्मेंद्र प्रधान को बुरी तरह पीटा गया था। उनके शरीर में कई जगह चोटें आईं और फ्रैक्चर भी हुआ था। 12 साल में पहली बार विरोध के बाद मंत्री का इस्तीफा 2014 में पहली बार मोदी सरकार बनने के बाद 12 साल के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान पहले मंत्री हैं, जिन्हें विरोध के चलते इस्तीफा देना पड़ा है। हालांकि, इससे पहले 2018 में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने इस्तीफा दिया था, लेकिन तब दुनियाभर में 'मी टू' आंदोलन चल रहा था और अकबर पर पत्रकारिता के दिनों में यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे। ——————————— ये खबरें भी पढ़ें… कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से जुड़ी भास्कर की ये खबरें भी पढ़ें… शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रह्लाद जोशी को चार्ज: जंतर-मंतर पर दीपके बोले- झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए इन 5 वजहों से घबराई सरकार, तब हुआ धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा; नहीं झुकते तो क्या हो जाता, आखिरकार आंदोलन खत्म RSS की सख्ती से गई प्रधान की कुर्सी: PM मोदी की इंस्टाग्राम पोस्ट से पहले सीक्रेट मीटिंग, 3 दिन में कैसे पलटा खेल ‘कॉकरोचों’ ने बीजेपी सरकार पर 5 बड़े डेंट मारे: ‘ये सरकार झुकती नहीं’ का नैरेटिव टूटा; क्या प्रधान के इस्तीफे के बाद डैमेज कंट्रोल होगा

प्रसंग

यह खबर "दावा-सरकार ने प्रधान का मंत्रालय बदलने का ऑफर दिया था:कॉकरोच पार्टी इस्तीफे की मांग पर अड़ी रही, कहा- कोई समझौता नहीं करेंगे" से जुड़ी है। अब तक जो जानकारी सामने आई है, उसका सार है: नीट पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा 25 जुलाई को हुआ। हालांकि, इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस्तीफे से पहले केंद्र सरकार ने छात्रों के प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से एक समझौते की कोशिश की थी

ऐसी खबरों में शुरुआती अपडेट और अंतिम तस्वीर के बीच अक्सर कुछ अंतर होता है। पाठकों के लिए मुख्य घटना, उसका असर और आगे आने वाले अपडेट को अलग-अलग समझना मददगार रहता है।

अपराध, अदालत, राजनीति, स्वास्थ्य या वित्त जैसे संवेदनशील विषयों में स्थिति समय के साथ बदल सकती है, इसलिए इस पर आगे भी अपडेट दिया जाएगा।

पाठकों पर असर

पाठकों के लिए यह खबर इसलिए अहम है क्योंकि यह तेजी से बदलते घटनाक्रम का संक्षिप्त, स्रोत-आधारित और साफ संदर्भ देती है।

NewzQuest दृष्टिकोण

NewzQuest की नजर में यह एक शुरुआती लेकिन महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, जिस पर आने वाले समय में और स्पष्टता आने की उम्मीद है।

आगे क्या देखना है

  • इस मुद्दे पर आने वाला अगला आधिकारिक बयान।
  • इसका आम लोगों और स्थानीय समुदाय पर पड़ने वाला असर।
  • आने वाले दिनों में सामने आने वाले नए घटनाक्रम।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

यह अपडेट पाठकों के लिए इसलिए अहम है क्योंकि यह तेजी से बदलती खबर पर शुरुआती संदर्भ देता है।

NewzQuest सटीक और जिम्मेदार रिपोर्टिंग के लिए प्रतिबद्ध है। अगर आपको इस खबर में कोई त्रुटि नजर आती है, तो कृपया हमें सूचित करें।

आगे क्या

NewzQuest इस विषय पर आने वाले हर नए अपडेट को ट्रैक करता रहेगा।

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