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थॉमस एल. फ्रीडमैन का कॉलम:दुनिया के तीन बड़े नेताओं की गलतियां हमें क्या सिखाती हैं?…

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थॉमस एल. फ्रीडमैन का कॉलम:दुनिया के तीन बड़े नेताओं की गलतियां हमें क्या सिखाती हैं?…

ट्रम्प, नेतन्याहू और पुतिन एक-दूसरे से बिल्कुल अलग व्यक्तित्व वाले नेता हैं, लेकिन उनमें एक समानता है- तीनों को यह गलतफहमी है कि किसी भी सभा में सबसे बुद्धिमान व्यक्ति वही होते हैं। तीनों ने अपने आसपास चाटुकारों की फौज इ

थॉमस एल. फ्रीडमैन का कॉलम:दुनिया के तीन बड़े नेताओं की गलतियां हमें क्या सिखाती हैं?। यह जानकारी ताज़ा है और आगे इसमें अपडेट संभव है।

जो भी जानकारी अब तक सामने आई है, उसे स्पष्ट और सरल भाषा में यहां पेश किया जा रहा है।

क्या बदला

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्थिति सामने रखी जा रही है। अधिक विवरण मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।

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मुख्य बातें

  • Main development: थॉमस एल. फ्रीडमैन का कॉलम:दुनिया के तीन बड़े नेताओं की गलतियां हमें क्या सिखाती हैं?
  • Filed under Opinion.

इस बीच मिली अतिरिक्त जानकारी के अनुसार, Thomas Friedman analyzes errors of Trump, Netanyahu, and Putin in latest global leadership commentary. ट्रम्प, नेतन्याहू और पुतिन एक-दूसरे से बिल्कुल अलग व्यक्तित्व वाले नेता हैं, लेकिन उनमें एक समानता है- तीनों को यह गलतफ

अब तक क्या सामने आया है

ट्रम्प, नेतन्याहू और पुतिन एक-दूसरे से बिल्कुल अलग व्यक्तित्व वाले नेता हैं, लेकिन उनमें एक समानता है- तीनों को यह गलतफहमी है कि किसी भी सभा में सबसे बुद्धिमान व्यक्ति वही होते हैं। तीनों ने अपने आसपास चाटुकारों की फौज इकट्ठा कर रखी है, इसलिए वे ऐसे युद्धों में उलझ गए हैं, जिनसे बाहर निकलने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं दिखता। सबसे पहले नेतन्याहू की बात करें। अपना संतुलन खो देने- और अपने साथ मोसाद के नेतृत्व को भी उसी दिशा में ले जाने का संकेत उनके दो फैसलों में स्पष्ट दिखाई देता है। पहला, यह मान लेना कि इजराइल केवल हवाई हमलों से तेहरान की सत्ता को गिरा सकता है। दूसरा, यह विश्वास करना कि वह ईरान का अगला नेता चुन सकता है। 1982 में मैंने देखा था कि किस तरह लेबनान की ईसाई मिलिशिया ने मोसाद को यह विश्वास दिला दिया था कि एक त्वरित सैन्य अभियान के जरिए इजराइल बेरूत में फिलिस्तीन-विरोधी नेता बशीर गेमायेल को राष्ट्रपति बना सकता है। तभी से मोसाद के बारे में मेरी यह धारणा रही है कि यदि आपको बेरूत या तेहरान में किसी की हत्या करानी हो, तो मोसाद को बुलाइए। पर यदि आपको बेरूत या तेहरान के राजनीतिक-सामाजिक रुझानों को समझना हो, तो उसके पास मत जाइए। जिस कारण वह पहले काम में माहिर है, वही उसे दूसरे काम में कमजोर बनाता है। मोसाद इजराइल के दुश्मनों का पता लगाकर उनका खात्मा करने में बेहद सक्षम है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि वह लेबनान, ईरान, वेस्ट बैंक और अरब जगत के अन्य हिस्सों में असंतुष्ट नागरिकों की भर्ती करने में सिद्धहस्त है। समस्या यह है कि यही लोग अकसर अपनी सरकार की कमजोरी को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं और यह आभास देते हैं कि उसे गिराना आसान होगा। परिणाम यह होता है कि ट्रम्प जैसे व्यक्ति- जिन्हें इतिहास की समझ नहीं है- यह मान बैठते हैं कि यदि मोसाद हत्याएं करने में सक्षम है, तो वह यह अनुमान लगाने में भी उतना ही सक्षम होगा कि उनके मारे जाने के अगले दिन क्या होने वाला है। यही वजह है कि फरवरी में व्हाइट हाउस में हुई बैठक के दौरान जब नेतन्याहू और मोसाद चीफ डेविड बरनिया ने कहा कि यदि इजराइल और अमेरिका मिलकर ईरान के शीर्ष नेताओं की हत्या कर दें तो वहां की सरकार गिर जाएगी और उसकी जगह अच्छे लोग सत्ता सम्भाल लेंगे, तो ट्रम्प ने इसे गम्भीरता से ले लिया। उन्होंने मान लिया कि ईरान भी उसी तरह उनके हाथ आ जाएगा, जैसे वेनेजुएला आ गया था। ट्रम्प और नेतन्याहू अकेले ऐसी गफलतों के शिकार नहीं हैं। पुतिन ने भी अपनी ही बनाई इस धारणा पर यकीन कर लिया कि यूक्रेन के लोग फिर से ‘मदर रशिया’ का हिस्सा बनने के लिए उत्सुक हैं और कीव की सरकार आसानी से गिर जाएगी। पुतिन की सबसे बुनियादी भूल यह मान बैठना था कि यूक्रेनी और रूसी एक ही लोग हैं और यूक्रेन की स्वतंत्रता केवल पश्चिम द्वारा गढ़ी गई कृत्रिम अवधारणा है। ईरान के मामले की ही तरह रूसी खुफिया एजेंसियां भी उन रूस-समर्थक स्रोतों पर अत्यधिक निर्भर रहीं, जिन्होंने मॉस्को को वही बताया जो वह सुनना चाहता था, बजाय इसके कि वे वास्तविकता का आकलन प्रस्तुत करते। नेतन्याहू ने हमास, हिजबुल्ला और तेहरान के खिलाफ सामरिक स्तर पर भले ही सफलताएं हासिल की हों, लेकिन वे उन्हें इजराइल के लिए किसी नई रणनीतिक वास्तविकता में बदलने में सफल नहीं हुए हैं। ट्रम्प ने बिना किसी सहयोगी, बिना अंतरराष्ट्रीय वैधता और बिना वैकल्पिक योजना के ईरान पर हमला करने का निर्णय लेकर अमेरिका को कमजोर और अलग-थलग कर दिया। साथ ही उन्होंने ईरान को दो ऐसे सस्ते और प्रभावी तरीकों का महत्व समझा दिया, जिनसे वह व्यापक व्यवधान पैदा कर सकता है- पहला, होर्मुज पर नियंत्रण; और दूसरा, अमेरिका के खाड़ी स्थित सहयोगी देशों को निशाना बनाना। और पुतिन रूस के कमजोर लोकतंत्र को एक पुलिस-स्टेट में बदल चुके हैं, जिसकी अर्थव्यवस्था पेट्रोलियम पर निर्भर है। आज एआई क्रांति में रूस कहीं दिखाई नहीं देता। ये तीनों नेता एक ऐसी बंद गली में पहुंच चुके हैं, जहां से निकलने के लिए वे बमबारी का सहारा लेने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रम्प, नेतन्याहू और पुतिन- तीनों को यह गलतफहमी है कि किसी भी सभा में सबसे बुद्धिमान व्यक्ति वही होते हैं। तीनों ने अपने आसपास चाटुकारों की फौज इकट्ठा कर रखी है, इसलिए वे ऐसे युद्धों में उलझ गए हैं, जिनसे बाहर निकलने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं दिखता। (द न्यूयॉर्क टाइम्स से)

प्रसंग

यह खबर "थॉमस एल. फ्रीडमैन का कॉलम:दुनिया के तीन बड़े नेताओं की गलतियां हमें क्या सिखाती हैं?" से जुड़ी है। अब तक जो जानकारी सामने आई है, उसका सार है: ट्रम्प, नेतन्याहू और पुतिन एक-दूसरे से बिल्कुल अलग व्यक्तित्व वाले नेता हैं, लेकिन उनमें एक समानता है- तीनों को यह गलतफहमी है कि किसी भी सभा में सबसे बुद्धिमान व्यक्ति वही होते हैं। तीनों ने अपने आसपास चाटुकारों की फौज इकट्ठा कर रखी है, इसलिए वे ऐसे युद्धों में उलझ गए हैं, जिनसे

ऐसी खबरों में शुरुआती अपडेट और अंतिम तस्वीर के बीच अक्सर कुछ अंतर होता है। पाठकों के लिए मुख्य घटना, उसका असर और आगे आने वाले अपडेट को अलग-अलग समझना मददगार रहता है।

अपराध, अदालत, राजनीति, स्वास्थ्य या वित्त जैसे संवेदनशील विषयों में स्थिति समय के साथ बदल सकती है, इसलिए इस पर आगे भी अपडेट दिया जाएगा।

पाठकों पर असर

पाठकों के लिए यह खबर इसलिए अहम है क्योंकि यह तेजी से बदलते घटनाक्रम का संक्षिप्त, स्रोत-आधारित और साफ संदर्भ देती है।

NewzQuest दृष्टिकोण

NewzQuest की नजर में यह एक शुरुआती लेकिन महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, जिस पर आने वाले समय में और स्पष्टता आने की उम्मीद है।

आगे क्या देखना है

  • इस मुद्दे पर आने वाला अगला आधिकारिक बयान।
  • इसका आम लोगों और स्थानीय समुदाय पर पड़ने वाला असर।
  • आने वाले दिनों में सामने आने वाले नए घटनाक्रम।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

यह अपडेट पाठकों के लिए इसलिए अहम है क्योंकि यह तेजी से बदलती खबर पर शुरुआती संदर्भ देता है।

NewzQuest सटीक और जिम्मेदार रिपोर्टिंग के लिए प्रतिबद्ध है। अगर आपको इस खबर में कोई त्रुटि नजर आती है, तो कृपया हमें सूचित करें।

आगे क्या

NewzQuest इस विषय पर आने वाले हर नए अपडेट को ट्रैक करता रहेगा।

Arjun Mehta

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