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अपराध

‘डार्लिंग शुरू करो’ कहकर लड़की ने विमान का अपहरण किया:पीरियड का खून दिखाकर भागी महिला, ‘कसाई…

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‘डार्लिंग शुरू करो’ कहकर लड़की ने विमान का अपहरण किया:पीरियड का खून दिखाकर भागी महिला, ‘कसाई…

‘स्पाई फाइल्स’ सीरीज में आज कहानी दुनिया के सबसे खतरनाक कमांडो मिशन ‘ऑपरेशन थंडरबोल्ट’ की… तारीख थी 27 जून 1976, इजराइल के तेल अवीव का बेन गुरियन एयरपोर्ट सुबह की गुनगुनी धूप से चमक रहा था। रनवे पर एयर फ्रांस की फ्लाइट-1

‘डार्लिंग शुरू करो’ कहकर लड़की ने विमान का अपहरण किया:पीरियड का खून दिखाकर भागी महिला, 'कसाई' के जाल में फंसे थे 245 लोग ; पार्ट-1। यह जानकारी ताज़ा है और आगे इसमें अपडेट संभव है।

जो भी जानकारी अब तक सामने आई है, उसे स्पष्ट और सरल भाषा में यहां पेश किया जा रहा है।

क्या बदला

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्थिति सामने रखी जा रही है। अधिक विवरण मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।

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मुख्य बातें

  • Main development: ‘डार्लिंग शुरू करो’ कहकर लड़की ने विमान का अपहरण किया:पीरियड का खून दिखाकर भागी महिला, 'कसाई' के जाल में फंसे थे 245 लोग ; पार्ट-1
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इस बीच मिली अतिरिक्त जानकारी के अनुसार, Mossad rescue mission Air France flight hijack story Tel Aviv operation details. तारीख थी 27 जून 1976, इजराइल के तेल अवीव का बेन गुरियन एयरपोर्ट सुबह की गुनगुनी धूप से चमक रहा था।

अब तक क्या सामने आया है

‘स्पाई फाइल्स’ सीरीज में आज कहानी दुनिया के सबसे खतरनाक कमांडो मिशन ‘ऑपरेशन थंडरबोल्ट’ की… तारीख थी 27 जून 1976, इजराइल के तेल अवीव का बेन गुरियन एयरपोर्ट सुबह की गुनगुनी धूप से चमक रहा था। रनवे पर एयर फ्रांस की फ्लाइट-139 खड़ी थी। यह एयरबस कंपनी का विमान था, किसी उड़ते हुए आलीशान महल जैसा। प्लेन में 228 यात्री और 12 क्रू मेंबर्स थे। पायलट थे सेकेंड वर्ल्ड वॉर में लड़ चुके कैप्टन माइकल बैकोस। सुबह के ठीक 8 बजकर 59 मिनट पर विमान ने उड़ान भरी। इसे ग्रीस के एथेंस में रुकते हुए पेरिस जाना था। दोपहर 12 बजे विमान एथेंस में लैंड हुआ। यहां 45 मिनट का ठहराव था। इस दौरान 38 यात्री प्लेन से उतरे। अब नए यात्रियों को सवार होना था। तब एथेंस एयरपोर्ट पर कड़ी चेकिंग नहीं होती थी। ऊपर से उस रोज एयरपोर्ट अथॉरिटी के कई लोग हड़ताल पर थे। इसी बीच चार लोग बड़े-बड़े बैग टांगे विमान की तरफ बढ़े। इनमें 30-32 साल की एक लड़की थी, जिसने ब्लू डेनिम स्कर्ट और टॉप पहन रखा था। जैसे ही सिक्योरिटी अफसर तलाशी के लिए आगे बढ़ा, लड़की ने झुंझलाकर कहा- ‘अरे फिर से जांच? हद है! जहां से आए हैं, वहां पहले ही चेकिंग हो चुकी है।’ लड़की की बात सुनकर अफसर झेंप गया। उसने बिना जांच किए सिर्फ टिकट देखकर जाने का इशारा कर दिया। 4 में से 2 के पास फर्स्ट क्लास का टिकट था और 2 के पास इकोनॉमी क्लास का। चारों अपनी सीट पर जाकर बैठ गए। एथेंस से 56 नए यात्री विमान में चढ़े, यानी अब कुल यात्रियों की संख्या 246 हो चुकी थी। दोपहर ठीक साढ़े 12 बजे, विमान ने पेरिस के लिए उड़ान भरी। अंदर हंसी-ठिठोली और बच्चों की किलकारियां गूंज रही थी। विमान बादलों को चीरता हुआ आगे बढ़ रहा था। तभी फर्स्ट क्लास की सीट पर बैठे एक शख्स ने डेनिम स्कर्ट पहनी लड़की का हाथ थाम लिया। उसने धीमी आवाज में मुस्कुराते हुए पूछा- ‘डर तो नहीं लग रहा?’ लड़की ने कहा- ‘मुझे डर है कि इस मिशन में तुम्हें ना खो दूं।’ उस शख्स ने उसका माथा चूमा और फुसफुसाया- ‘हम इतिहास लिखने जा रहे हैं डार्लिंग। तैयार हो?' लड़की ने मुस्कुराते हुए कहा- ‘शुरू करो, मैं तैयार हूं।’ ठीक 8 मिनट बाद, दोनों अपनी सीट से उठ खड़े हुए। गले लगे। एक दूसरे को चूमा और फिर फुर्ती से अपने बैग की चेन खोल ली। अगले ही पल दोनों के एक हाथ में पिस्टल और दूसरे हाथ में हैंड ग्रेनेड था। पिस्टल ताने वह शख्स सीधे कॉकपिट की तरफ भागा और लड़की गलियारे में पोजीशन लेकर बैठ गई। ये सब देखकर कुछ यात्री चीखने लगे। पायलट ने हड़बड़ाकर फ्लाइट इंजीनियर से कहा- ‘जल्दी बाहर जाओ। शायद आग लग गई है। तुरंत काबू करो।’ फ्लाइट इंजीनियर ने जैसे ही कॉकपिट का दरवाजा खोला, उस शख्स ने इंजीनियर की कनपट्टी पर पिस्टल सटा दी। अंदर बैठा पायलट चिल्ला उठा- ‘प्लीज, उसे मत मारो।’ उसने झपटकर पायलट का ऑक्सीजन मास्क और माइक्रोफोन छीन लिया। फिर ऐलान किया- ‘सब लोग ध्यान से सुनो… यह प्लेन हाईजैक हो चुका है। अब प्लेन का नया नाम 'हाइफा' है।’ उसने पायलट की कनपट्टी पर पिस्टल सटाते हुए कहा- ‘फौरन प्लेन का रुख मोड़ो… इसे लीबिया ले चलो।’ पायलट ने कुछ कहना चाहा, लेकिन उसने पिस्टल की नोक उसकी कनपट्टी पर और जोर से गड़ा दी। पायलट ने प्लेन का रूख मोड़ दिया। यात्री सन्न थे। आगे क्या होने वाला था किसी को पता नहीं… इसी बीच इकोनॉमी क्लास में बैठे उनके दो और साथी खड़े हो गए। उनमें से एक लंबे बालों वाला लड़का था, जिसने लाल शर्ट और भूरे रंग का पैंट पहना था। दूसरे की घनी मूछें थीं, उसने लंबा पैंट और पीली शर्ट पहन रखी थी। दोनों ने पिस्टल तान ली और दौड़ते हुए फर्स्ट-क्लास कंपार्टमेंट की तरफ बढ़े। गलियारे में डरी-सहमी एयरहोस्टेस खड़ी थी। उसके हाथ-पैर कांप रहे थे, लेकिन वो यात्रियों से कह रही थी- ‘प्लीज… प्लीज सब शांत हो जाओ।’ लेकिन लोगों का रोना-चीखना बंद नहीं हो रहा था। 5-7 मिनट बाद, महिला हाईजैकर और उसके दो साथी कुछ यात्रियों घसीटते हुए फर्स्ट क्लास से इकोनॉमी क्लास की तरफ लाने लगे। हाईजैकर अंग्रेजी में चिल्ला रही थी- ‘सिट ऑन फ्लोर!’ तभी एक इजराइली खड़ा होकर विरोध करने लगा। हाईजैकर तमतमा गई। उसने अपने साथी से कहा- ‘इसका इलाज करना जरूरी है।’ उसके साथी ने इजराइली को धक्का देकर फर्श पर गिरा दिया। महिला हाईजैकर उछलकर उसकी छाती पर बैठ गई और मुक्के मारने लगी। कुछ देर बाद जब महिला के हाथ दुखने लगे, तो उसने पिस्टल के बट से मारना शुरू कर दिया। इजराइली लगातार चीखता रहा, फिर शांत पड़ गया। इसी बीच कुछ यात्री चुपके से गले की चेन तोड़कर फेंकने लगे। असल में इन लोगों ने 'डेविड का सितारा' पहन रखा था, जो यहूदियों की पहचान का प्रतीक है। ठीक वैसे ही जैसे ईसाइयों के लिए 'क्रॉस' या इस्लाम में 'चांद-तारा' होता है। इधर, तेल अवीव के एयर ट्रैफिक कंट्रोल, यानी एटीसी में खलबली मची थी। रडार स्क्रीन पर दिख रहा एयर फ्रांस 139 अचानक गायब हो गया था। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि विमान के साथ क्या हुआ है। उस वक्त इजराइली प्रधानमंत्री यित्झाक राबिन मंत्रियों के साथ मीटिंग कर रहे थे। तभी उनके सैन्य सहायक ब्रिगेडियर पोरान दौड़ते हुए कमरे में दाखिल हुए। उन्होंने पीएम को एक पर्ची दी। उस पर लिखा था- 'तेल अवीव से पेरिस जा रहा एयर फ्रांस 139 अगवा कर लिया गया है।’ छोटे कद के राबिन, इजराइली सेना के प्रमुख रह चुके थे। वे पर्ची को एकटक देखते रहे। फिर उन्होंने पर्ची के पीछे कुछ लिखा और पोरन को दे दिया। पीएम ने सिगरेट जलाई और लंबा कश भरते हुए विदेश मंत्री आलोन से कहा- ‘हमारा एक विमान हाईजैक हो चुका है। फौरन स्पेशल टास्क फोर्स बनाओ। उसमें मुझे भी रखना।’ एक घंटे बाद… यरुशलम का कमांड सेंटर। दीवारों पर लगे नक्शे और स्क्रीन पर जलती-बुझती लाइटें। पीएम बेहद परेशान थे। वे सिगरटे पीते हुए कमरे में इधर-उधर टहल रहे थे। पीछे कैबिनेट मंत्री चुपचाप बैठे थे। पीएम ने कानून मंत्री की तरफ देखते हुए पूछा- ‘कानूनी तौर पर इन यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?' कानून मंत्री ने फौरन जवाब दिया- ‘सर, फ्रांस सरकार की।’ ‘तो फौरन फ्रांस सरकार से संपर्क कीजिए। उनसे कहिए कि वे अपना आधिकारिक बयान जारी करें।’ पीएम ने कहा। तभी सैन्य सहायक पोरान कमरे में दाखिल हुए। उनके हाथ में फिर से एक छोटी सी पर्ची थी। उन्होंने पर्ची पीएम की तरफ बढ़ा दी। अब सबकी निगाहें राबिन पर टिक गई। राबिन ने पर्ची खोली। तेज आवाज में पढ़ना शुरू किया- ‘विमान में 230 यात्री सवार हैं, जिनमें से 83 इजराइली हैं। लीबियाई सरकार ने विमान को बेनगाजी में उतरने की इजाजत दे दी है।’ राबिन ने सिगरेट का लंबा कश खींचते कहा- ‘कम से कम हमें यह तो पता है कि यात्री कहां हैं, लेकिन आगे उनके साथ क्या होगा, नहीं पता। ये भी नहीं मालूम कि हाईजैकर कौन हैं, उनका मकसद क्या है?’ अगले आधे घंटे तक कमांड सेंटर में मीटिंग चलती रही, लेकिन कोई रास्ता नहीं सूझा। दोपहर 2 बजे विमान लीबिया के बेनगाजी एयरपोर्ट के रनवे पर जाकर खड़ा हो गया। हाईजैकरों ने विमान की खिड़कियां बंद कर दीं। एसी भी बंद कर दिए। गर्मी, उमस और भूख से यात्री बेहाल थे, लेकिन कोई किसी से कुछ कह नहीं रहा था। कई यात्री मान चुके थे कि किसी भी वक्त विमान को धमाके से उड़ाया जा सकता है। तभी एक ब्रिटिश महिला चीखने लगी। उसका चेहरा पीला पड़ चुका था, बदन पसीने से लथपथ था। उसने रोते हुए कहा- ‘मैं प्रेग्नेंट हूं। बहुत तेज दर्द हो रहा है। मुझे कुछ हो जाएगा।’ हाईजैकर ने डांटते हुए कहा- ‘चीखो मत, मैं डॉक्टर को बुलाती हूं।’ यात्रियों के बीच से एक डॉक्टर को लाया गया। डॉक्टर ने उसे देखने के लिए हाथ आगे बढ़ाया, तभी महिला ने धीमे से कहा, ‘मुझे हर हाल में यहां से निकलना है… तुम संभाल लेना।’ डॉक्टर ने भी धीरे से कहा- ‘लीबिया में उतरने से बेहतर है तुम हमारे साथ रहो।’ महिला बुदबुदाई- ‘मुझे उतरना ही है।’ अब डॉक्टर खड़ा हुआ और हाईजैकर से कहा- ‘इसे मेडिकल इमरजेंसी की जरूरत है।’ महिला हाईजैकर को लगा कि डॉक्टर झूठ बोल रहा है। उसने रनवे पर तैनात एक लीबियाई डॉक्टर को अंदर बुला लिया। नया डॉक्टर क्या करने वाला था…सबकी निगाहें उस पर टिक गईं। डॉक्टर ने महिला की जांच की। फिर कहा- ‘इसे कोई बीमारी नहीं है, नाटक कर रही है।’ अब ब्रिटिश महिला ने अपने कपड़ों का एक हिस्सा हटाया और प्राइवेट पार्ट से निकलता हुआ खून दिखा दिया। वह रोते हुए चिल्लाई, ‘अगर मैं जल्दी अस्पताल नहीं पहुंची, तो गर्भपात हो जाएगा। मेरा बच्चा भी मर जाएगा।’ खून देखकर हाईजैकर घबरा गई। उसने अपने साथियों से कहा, ‘इसे नीचे उतार दो। वैसे भी यह हमारे काम की नहीं है।’ महिला गिरते-संभलते सीढ़ियों से उतरने लगी। उसके कपड़ों पर खून के धब्बे थे। हाईजैकर को यकीन हो चुका था कि यह सच बोल रही है। महिला विमान से उतरकर एग्जिट गेट की तरफ बढ़ गई। आगे चलकर ये महिला कुछ बड़ा करने वाली थी, बहुत बड़ा… इधर, विमान रनवे पर घंटों खड़ा रहा। हाईजैकर अंदर-बाहर आते-जाते रहे। खुद भर-भर पेट खाना खाया, लेकिन यात्रियों को कुछ नहीं दिया। आखिरकार, रात 9 बजकर 50 मिनट पर विमान के इंजनों में फिर से गड़गड़ाहट हुई। लोग सोचने लगे- ‘दमिश्क, बगदाद, बेरुत या वापस तेल अवीव? आखिर ये विमान को कहां ले जा रहे हैं?’ दहशत चरम पर थी। डेनिम स्कर्ट वाली लड़की खिड़की से बाहर अंधेरे को निहार रही थी। तभी उसका साथी पीछे आकर खड़ा हो गया। उसने लड़की के बिखरे बालों सहलाते हुए कहा, ‘अगर इस जंग से हम जिंदा निकले, तो एक सुंदर सा घर बनाएंगे। जहां सिर्फ मैं, तुम और समुद्र की लहरें होंगी, लेकिन तब तक… हमें बेदर्द बनना होगा।’ लड़की पिस्टल का बट कसकर पकड़ते हुए बोली- ‘उस सपने को थोड़ा इंतजार करने दो।’ रात करीब 10 बजे। जगह- लंदन का हीथ्रो एयरपोर्ट। लीबिया में गर्भपात की बात कहकर उतरी ब्रिटिश महिला एग्जिट गेट से निकलने ही वाली थी कि दो लड़कों ने उसका रास्ता रोक लिया। महिला चौंककर पीछे हटी। ‘आप लोग कौन हैं? मुझे जाने दीजिए।’ एक लड़के ने कहा- ‘मैडम, हम आपकी सुरक्षा के लिए हैं। आप एयर फ्रांस की फ्लाइट से आई हैं। कृपया हमारे साथ चलिए।’ वे महिला को लेकर वीआईपी कॉरिडोर की तरफ चल पड़े। कुछ ही मिनटों में तीनों एक बंद कमरे में थे। कुर्सी पर बैठी महिला घबराई हुई थी। उसके हाथ-पैर कांप रहे थे। लड़के ने कहा- ‘डरिए नहीं। हम कोई आतंकी नहीं हैं। उस प्लेन में हमारे कई लोग बंद हैं। आपकी मदद चाहिए।’ महिला रोने लगी- ‘वह नरक जैसा था। मैं अंदर होती तो अब तक मर गई होती। मैंने बस बाहर निकलने के लिए वो सब किया।’ लड़का- ‘क्या किया आपने?’ ‘मुझे पीरियड्स आए थे। मैंने उस खून को हाईजैकर को दिखाकर कहा मिसकैरेज होने वाला है। इमरजेंसी मेडिकल सपोर्ट चाहिए। उन लोगों ने मुझे नीचे उतार दिया।’ कांपते हुए महिला ने बताया। तभी दूसरे लड़के ने कहा- 'बहादुर हो आप। वेल डन। ये बताइए कि कुल कितने हाईजैकर थे? उनके पास हथियार कौन से थे? महिला बोली- ‘चार… कुल चार लोग हैं। उनके पास ऑटोमैटिक पिस्टल और हैंडग्रेनेड है।’ ‘क्या वे अरबी बोल रहे थे? उनका हुलिया कैसा था?’ लड़के ने पूछा। महिला ने कुछ सोचते हुए कहा- ‘दो तो पक्के तौर पर फिलिस्तीनी लग रहे थे… लेकिन बाकी के दो बहुत साफ अंग्रेजी बोल रहे थे, उनका लहजा जर्मन था। उनमें एक औरत भी थी।’ अब लड़के ने एक भारी-भरकम एलबम महिला की तरफ सरकाते हुए कहा- ‘मैं पन्ने पलट रहा हूं, आप ध्यान से देखिए। क्या इनमें से कोई चेहरा उस विमान में था?’ उसने पहला पन्ना पलटा। कई ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरें दिखीं। महिला ने सिर हिलाया- ‘नहीं।’ उसने दूसरा पन्ना पलटा। महिला ठिठक गई। उसने उंगली दो तस्वीरों पर रख दी। चीखते हुए कहा- ‘यह वही औरत है। इसके साथ यह आदमी है। यही दोनों पूरे प्लेन को कंट्रोल कर रहे थे। प्रेमी-प्रेमिका मालूम पड़ रहे थे।’ दोनों लड़कों ने डायरी पर सबकुछ नोट किया। फिर कार में बिठाकर महिला को सुरक्षित घर छोड़ दिया। असल में ये दोनों लड़के इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद के एजेंट थे। उधर, विमान को लीबिया से उड़ान भरे पांच घंटे बीत चुके थे। पायलट थकान से चूर था, लेकिन हाईजैकर की पिस्टल अभी भी उसकी गर्दन पर टिकी हुई थी। तभी केबिन में महिला हाईजैकर ने अनाउंस किया- ‘हम कंपाला में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। खिड़कियां बंद कर लें और सीट बेल्ट बांध लें।’ ‘कंपाला?’ यात्री हैरान थे। ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं था कि यह युगांडा की राजधानी है। तड़के ठीक 3:20 पर, घुप अंधेरे में विमान युगांडा के एंटेबे एयरपोर्ट पर उतरा। पलक झपकते युगांडा के 100 से ज्यादा सैनिकों ने विमान को घेर लिया। यात्रियों को लगा शायद सेना उन्हें बचाने आ गई है, लेकिन असल में वे कसाई नाम से मशहूर तानाशाह ईदी अमीन के जाल में फंस चुके थे। थोड़ी देर बाद एग्जिट गेट खुला। तीन और हथियारबंद अंदर घुसे। दरवाजा बंद हो गया। आगे क्या होगा किसी को कुछ नहीं पता था… खौफ के साये में और 5 घंटे गुजर गए। सुबह 8 बजे विमान का अगला दरवाजा खुला। एक काली मर्सिडीज गेट के ठीक सामने आकर रुकी। उसमें से दो शख्स उतरे। एक लंबा और नीली वर्दी वाला और दूसरा- भारी-भरकम शरीर वाला, जिसकी वर्दी मेडलों से सजी थी। विमान के भीतर बैठे एक यात्री ने फुसफुसाते हुए बगल में बैठे मुसाफिर से पूछा- ‘तुम जानते हो यह कौन है?’ ‘नहीं, कौन है?’ ‘यह युगांडा का राष्ट्रपति ईदी अमीन है। यह कसाई है। इसने अपने ही हजारों लोगों को मरवा दिया है। मैंने तो सुना है इंसानों का भी मांस खा जाता है।’ तभी पीछे से एक बुजुर्ग यहूदी बोल पड़ा- ‘तुम ठीक कह रहे हो। इसके फ्रीज से कई इंसानी खोपड़ियां मिली थीं। हर सुबह उन खोपड़ियों से बातें करता है कि देखो, कहा था ना मुझसे पंगा मत लेना।’ फर्स्ट क्लास की खिड़की से अमीन को देखकर एक महिला हंस पड़ी। दूसरी ने पूछा- ‘इस हालत में तुम्हें हंसी आ रही है?’ उसने धीरे से कहा- ‘तुम्हें पता है, बाहर जो सनकी खड़ा है, ब्रिटेन की महारानी से शादी करना चाहता है।’ ‘प्लीज मजाक मत करो, मेरी जान निकली जा रही है।’ महिला ने उसका हाथ कसकर दबाते हुए कहा। उस महिला ने कहा- ‘सच कह रही हूं। इसने महारानी को चिट्ठी भी लिखी थी।’ ‘क्या लिखा था?’ महिला बोली- ‘इसने लिखा था- प्यारी एलिजा, अगर एक असली मर्द को देखना चाहती हो, तो कंपाला आ जाओ।’ दूसरी महिला ने उसे घूरते हुए कहा- ‘यह हैवान तो हम यहूदियों को जिंदा चबा जाएगा।’ पहली महिला- 'हां ये लोग उसी की तैयारी कर रहे हैं।' दोपहर 12 बजे यात्रियों को विमान से उतारकर एयरपोर्ट के बगल में बने 'ओल्ड टर्मिनल' हॉल में ले जाकर बंद कर दिया गया। हाईजैकरों के साथ-साथ युगांडा के सैनिकों ने पूरे टर्मिनल को घेर रखा था। पूरी रात यात्री कमरे में बंद रहे। अगले दिन यानी 29 जून को हाईजैकरों ने दुनिया के सामने अपनी 2 मांगे रखीं। पहली- इजराइल, केन्या, पश्चिम जर्मनी और स्विट्जरलैंड की जेलों में बंद 53 फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई। दूसरी- 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर नकद। डेडलाइन थी- ‘1 जुलाई 1976, दोपहर 2:00 बजे तक मांगें पूरी नहीं हुईं, तो सभी बंधक मार दिए जाएंगे।’ उसी शाम 5 बजे की बात है। इजराइली पीएम राबिन अपने दफ्तर में अकेले बैठे थे। एक हाथ में व्हिस्की का ग्लास और दूसरे हाथ में सिगरेट। तभी रक्षा मंत्री पेरेस पहुंचे। राबिन ने उन्हें देखते ही कहा- ‘मैं इन हत्यारों के आगे झुक जाऊंगा। कैदियों को रिहा कर दूंगा।’ रक्षा मंत्री ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा- ‘हम हार नहीं मानेंगे। मिलिट्री एक्शन लेंगे।’ पीएम राबिन ने चिल्लाते हुए कहा- 'एंटेबे यहां से 4 हजार किलोमीटर दूर है। बीच में दुश्मन देशों का एयरस्पेस। हमारे विमान वहां कैसे पहुंचेंगे?’ रक्षा मंत्री ने कुछ कहा नहीं। थोड़ी देर बाद चुपचाप वहां से निकल गए, लेकिन उनकी खामोशी के पीछे एक ऐसा प्लान चल रहा था, जिसके बारे में हाईजैकरों ने सपने में भी नहीं सोचा था। अब रात के करीब 2 बज चुके थे। ओल्ड टर्मिनल हॉल के मेन गेट पर पहरा दे रही डेनिम स्कर्ट वाली हाईजैकर चश्मा उतारकर आंखें मल रही थी। तभी उसका साथी वहां पहुंच गया। उसने कॉफी का कप उसकी तरफ बढ़ाते हुए कहा- ‘हमारी खूंखार शेरनी थक गई है क्या?’ लड़की ने उसके कंधे पर अपना सिर टिकाते हुए कहा- 'हां, शेरनी भी थकती है। हम हैवान नहीं हैं। बस अपने मकसद के लिए लड़ रहे हैं।’ उस शख्स ने उसके हाथों को चूमते हुए कहा- ‘1 जुलाई को दुनिया हमारी मुट्ठी में होगी।’ लड़की ने कहा- 'डार्लिंग, तुम कहो तो सबको अभी ही खत्म कर दूं।' उस शख्स ने हंसते हुए कहा- 'अभी थोड़ा आराम कर लो।' 30 जून की सुबह करीब 10 बजे का वक्त। महिला हाईजैकर बंधकों के पास पहुंची। उसके हाथ में एक लिस्ट थी। उसने कहा- ‘सभी अपने-अपने पासपोर्ट हाथों में ले लें। जैसे ही आपका नाम पुकारा जाए, बाईं तरफ के कमरे में चले जाएं।’ उसने नाम पुकारने शुरू किए। सारे के सारे इजराइली नाम। इस तरह इजराइली अलग कमरे में और गैर-इजराइली अलग कमरे में शिफ्ट कर दिए गए। यह हूबहू वैसा ही नजारा था, जैसा दूसरे विश्व युद्ध के दौरान नाजी जर्मनी के कैंपों में था। अब उल्टी गिनती शुरू हो चुकी थी। दीवारों पर टंगी घड़ियों की हर टिक-टिक के साथ 100 से ज्यादा जिंदगियों पर मौत का खौफ गहराता जा रहा था… इजराइल के पास बचे थे सिर्फ 24 घंटे। तभी मोसाद के दफ्तर में फोन बजा। एक अफसर ने दौड़कर फोन उठाया। दूसरी तरफ से आई आवाज को सुनते ही वह खुशी से उछल पड़ा। आगे क्या होगा…पूरी कहानी कल यानी रविवार को पढ़िए आपरेशन थंडरबोल्ट पार्ट-2 रेफरेंस : 1. Operation Thunderbolt: Flight 139 and the Raid on Entebbe Airport : By Saul David. 2. A State of Blood: The Inside Story of Idi Amin : By Henry Kyemba

प्रसंग

यह खबर "‘डार्लिंग शुरू करो’ कहकर लड़की ने विमान का अपहरण किया:पीरियड का खून दिखाकर भागी महिला, 'कसाई' के जाल में फंसे थे 245 लोग ; पार्ट-1" से जुड़ी है। अब तक जो जानकारी सामने आई है, उसका सार है: ‘स्पाई फाइल्स’ सीरीज में आज कहानी दुनिया के सबसे खतरनाक कमांडो मिशन ‘ऑपरेशन थंडरबोल्ट’ की… तारीख थी 27 जून 1976, इजराइल के तेल अवीव का बेन गुरियन एयरपोर्ट सुबह की गुनगुनी धूप से चमक रहा था। रनवे पर एयर फ्रांस की फ्लाइट-139 खड़ी थी। यह एयरबस कंपनी का विमान था, किसी उड़ते हुए आलीशा

ऐसी खबरों में शुरुआती अपडेट और अंतिम तस्वीर के बीच अक्सर कुछ अंतर होता है। पाठकों के लिए मुख्य घटना, उसका असर और आगे आने वाले अपडेट को अलग-अलग समझना मददगार रहता है।

अपराध, अदालत, राजनीति, स्वास्थ्य या वित्त जैसे संवेदनशील विषयों में स्थिति समय के साथ बदल सकती है, इसलिए इस पर आगे भी अपडेट दिया जाएगा।

पाठकों पर असर

पाठकों के लिए यह खबर इसलिए अहम है क्योंकि यह तेजी से बदलते घटनाक्रम का संक्षिप्त, स्रोत-आधारित और साफ संदर्भ देती है।

NewzQuest दृष्टिकोण

NewzQuest की नजर में यह एक शुरुआती लेकिन महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, जिस पर आने वाले समय में और स्पष्टता आने की उम्मीद है।

आगे क्या देखना है

  • इस मुद्दे पर आने वाला अगला आधिकारिक बयान।
  • इसका आम लोगों और स्थानीय समुदाय पर पड़ने वाला असर।
  • आने वाले दिनों में सामने आने वाले नए घटनाक्रम।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

यह अपडेट पाठकों के लिए इसलिए अहम है क्योंकि यह तेजी से बदलती खबर पर शुरुआती संदर्भ देता है।

NewzQuest सटीक और जिम्मेदार रिपोर्टिंग के लिए प्रतिबद्ध है। अगर आपको इस खबर में कोई त्रुटि नजर आती है, तो कृपया हमें सूचित करें।

आगे क्या

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Fatima Khan

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