आज का एक्सप्लेनर:दर्जनों विपक्षी सांसद टूटे, क्या फिर भी नंबर्स नहीं जुटा पाई मोदी सरकार; सं…

मोदी सरकार ने 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र का एजेंडा बता दिया। कुल 7 विधेयकों की सूची में 2 पुराने और 5 नए विधेयक हैं। इसमें ‘परिसीमन विधेयक’ का जिक्र नहीं है, जिसके लिए जरूरी दो-तिहाई सांसदों का समर्थन जु
आज का एक्सप्लेनर:दर्जनों विपक्षी सांसद टूटे, क्या फिर भी नंबर्स नहीं जुटा पाई मोदी सरकार; संसद सत्र के एजेंडे से गायब क्यों है ‘परिसीमन बिल’। यह घटनाक्रम फिलहाल सुर्खियों में है।
उपलब्ध जानकारी के आधार पर पूरी घटना को सिलसिलेवार ढंग से यहां समझाया जा रहा है।
क्या बदला
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्थिति सामने रखी जा रही है। अधिक विवरण मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।
मुख्य बातें
- Main development: आज का एक्सप्लेनर:दर्जनों विपक्षी सांसद टूटे, क्या फिर भी नंबर्स नहीं जुटा पाई मोदी सरकार; संसद सत्र के एजेंडे से गायब क्यों है ‘परिसीमन बिल’
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इस बीच मिली अतिरिक्त जानकारी के अनुसार, PM Narendra Modi BJP Government Monsoon Session 2026 Bills Agenda And Strategy Explained; Follow Delimitation Bill, PM-CM Jail Bill, Women टॉप न्यूज़राज्य-शहरक्रिकेटभास्कर खासDB ओरिजिनलभास्कर इन्वेस्टिगेशनस्पोर्ट्सबॉलीवुडजॉब – एजुकेशनबिजनेसल कुल 7 विधेयकों की सूची में 2 पुराने और 5 नए विधेयक हैं।
अब तक क्या सामने आया है
मोदी सरकार ने 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र का एजेंडा बता दिया। कुल 7 विधेयकों की सूची में 2 पुराने और 5 नए विधेयक हैं। इसमें ‘परिसीमन विधेयक’ का जिक्र नहीं है, जिसके लिए जरूरी दो-तिहाई सांसदों का समर्थन जुटाने के लिए सरकार ने एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा है। क्या दर्जनों विपक्षी सांसद तोड़ने के बावजूद नंबर्स नहीं जुटा पाई सरकार या संसद सत्र के बीच अचानक चौंका देगी; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: परिसीमन विधेयक है क्या और अप्रैल में पारित क्यों नहीं हो सका था? जवाबः आम बोलचाल में जिसे हम परिसीमन विधेयक कह रहे, वो दो विधेयकों का पैकेज है। जिसमें लोकसभा की अधिकतम सीटें 550 से बढ़ाकर 850 करने और लोकसभा क्षेत्रों का आकार दोबारा तय करने (परिसीमन) के प्रावधान हैं। मोदी सरकार ने 16 से 18 अप्रैल 2026 को संसद का विशेष सत्र बुलाकर ये विधेयक पेश किए। तर्क दिया कि 2029 चुनाव तक महिला आरक्षण कानून लागू करने के लिए इन्हें पारित होना जरूरी है। विपक्षी पार्टियां इसके विरोध में एकजुट हो गईं। उनका तर्क था कि महिला आरक्षण की आड़ में बीजेपी अपना एजेंडा पूरा करना चाहती है। परिसीमन विधेयक से ज्यादा जनसंख्या वाले हिन्दी भाषी राज्यों को फायदा मिलेगा, जहां बीजेपी का गढ़ है। जबकि जनसंख्या वृद्धि रोकने वाले राज्यों को नुकसान होगा। संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत जरूरी होता है। यानी वोटिंग में आधे से ज्यादा सदस्य सदन में मौजूद हों और जितने सदस्य मौजूद हैं, उनमें से कम से कम दो-तिहाई सांसद इसके पक्ष में वोट दें… सवाल-2: क्या इसबार भी सरकार जरूरी नंबर्स नहीं जुटा पाई? जवाबः अप्रैल के मुकाबले दोनों सदनों में सरकार का समर्थन बढ़ा है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत से अब भी पीछे है… लोकसभा में NDA के साथ 318 सांसद राज्यसभा में NDA के साथ 152 सांसद सवाल-3: तो क्या मानसून सत्र में परिसीमन विधेयक नहीं आएगा? जवाबः संविधान के आर्टिकल 368 के तहत संविधान संशोधन विधेयक पेश करने के लिए राष्ट्रपति की अनुमति नहीं लेनी होती। इसे सरकार का कोई मंत्री या सांसद निजी तौर पर भी संसद सत्र के दौरान पेश कर सकता है। ऐसा भी कोई नियम नहीं है कि सत्र के एजेंडे में बिल के बारे में बताना जरूरी हो। इतिहास में भी कई संविधान संशोधन बिल अचानक लाए जा चुके हैं। कई संकेत हैं कि सरकार सत्र के बीच किसी दिन परिसीमन बिल ला सकती है… सवाल-4: तो फिर बिल पारित कराने के लिए सरकार के पास और क्या रास्ते हैं? जवाब: फिलहाल सरकार लोकसभा में दो-तिहाई के आंकड़े से 41 सीट और राज्यसभा में 11 सीट दूर है। ये कमी कुछ छोटे क्षेत्रीय दलों से पूरी हो सकती है… 1. लोकसभा में शरद पवार की NCP, DMK और JMM के सांसदों पर दांव 2. राज्यसभा में YSR कांग्रेस और बीजू जनता दल की जरूरत सवाल-5: आखिर परिसीमन बिल पारित होने से क्या हो जाएगा, बीजेपी इतना जोर क्यों लगा रही? जवाबः नए परिसीमन के बाद लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में 50% सीटें बढ़ेंगी। गृहमंत्री अमित शाह ने इसका फॉर्मूला बताते हुए कहा था, ‘मान लीजिए कि 100 सीटें हैं, जिसमें 33% आरक्षण देना है, तो इसमें 50 सीटें बढ़ाएंगे। इस हिसाब से 150 सीट होती हैं। लोकसभा में ये राउंड ऑफ फिगर 850 है।' सरकार का कहना था कि सारे राज्यों में सीटें 'आनुपातिक रूप से' बढ़ेंगी। यानी, अगर 543 सीटों की लोकसभा में तमिलनाडु के पास 7.18% हिस्सेदारी, यानी 39 सीटें हैं, तो 850 सीटों की लोकसभा में भी 7.18% हिस्सेदारी यानी 61 सीटें होंगी। हालांकि परिसीमन विधेयक में सीटें 'आनुपातिक रूप से बढ़ाने’ की गारंटी देने वाला कोई प्रावधान नहीं है। इसके उलट संविधान का अनुच्छेद 81(2)(a) कहता है कि सीटें जनसंख्या के अनुपात में मिलेंगी, न कि सभी राज्यों में बराबर प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होगी। इसमें भी सरकार ने कोई बदलाव नहीं किया। यानी 2011 की जनगणना के आधार पर जनसंख्या के अनुपात से ही परिसीमन हो सकता है। ऐसे में ज्यादा जनसंख्या वाले राज्यों को ज्यादा सीटें और कम जनसंख्या वाले राज्यों को कम सीटें मिलेंगी। इससे यूपी, बिहार, राजस्थान, दिल्ली और मध्य प्रदेश सबसे ज्यादा फायदा में होंगे। ये सभी हिंदी बेल्ट के राज्य हैं, जहां बीजेपी का स्ट्रॉन्ग होल्ड है। इससे बीजेपी के पिछले तीन चुनावों के आंकड़ों के आधार पर उसके लिए अच्छे और बुरे दोनों सिनैरियो में फायदा है… 1. बीजेपी के लिए बेस्ट केस सिनैरियोः अगर 2019 का प्रदर्शन दोहराती है 2. बीजेपी के वर्स्ट केस सिनैरियो: अगर 2024 का प्रदर्शन दोहराती है —— ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:मोदी सरकार को क्यों चाहिए 362 सांसद; TMC के 20, शिवसेना UBT के 6 सांसद टूटे; बाकी 44 कहां से जुटाएंगे 14 जून को TMC के 28 में से 20 लोकसभा सांसदों ने गुमनाम सी पार्टी NCPI में विलय कर लिया। आज शिवसेना (उद्धव गुट) के 9 से 6 लोकसभा सांसदों ने भी बगावत कर दी। इससे पहले 24 अप्रैल को आम आदमी पार्टी के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने भी बगावत कर दी थी। ये सभी बागी BJP या NDA में शामिल हो रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…
प्रसंग
यह खबर "आज का एक्सप्लेनर:दर्जनों विपक्षी सांसद टूटे, क्या फिर भी नंबर्स नहीं जुटा पाई मोदी सरकार; संसद सत्र के एजेंडे से गायब क्यों है ‘परिसीमन बिल’" से जुड़ी है। अब तक जो जानकारी सामने आई है, उसका सार है: मोदी सरकार ने 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र का एजेंडा बता दिया। कुल 7 विधेयकों की सूची में 2 पुराने और 5 नए विधेयक हैं। इसमें ‘परिसीमन विधेयक’ का जिक्र नहीं है, जिसके लिए जरूरी दो-तिहाई सांसदों का समर्थन जुटाने के लिए सरकार ने एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा है। क्या दर्जन
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NewzQuest दृष्टिकोण
NewzQuest की नजर में यह एक शुरुआती लेकिन महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, जिस पर आने वाले समय में और स्पष्टता आने की उम्मीद है।
आगे क्या देखना है
- इस मुद्दे पर आने वाला अगला आधिकारिक बयान।
- इसका आम लोगों और स्थानीय समुदाय पर पड़ने वाला असर।
- आने वाले दिनों में सामने आने वाले नए घटनाक्रम।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
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