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Unique Temple: भगवान विष्णु के सहस्त्रबाहु मंदिर का ‘सास-बहू’ नाम पड़ने के पीछे क्या है Fact?…

August 21, 2026 | by Priya Nair

Unique Temple: भगवान विष्णु के सहस्त्रबाहु मंदिर का ‘सास-बहू’ नाम पड़ने के पीछे क्या है Fact?…

Unique Temple: भगवान विष्णु के सहस्त्रबाहु मंदिर का 'सास-बहू' नाम पड़ने के पीछे क्या है Fact? जानें पूरा सच। यह घटनाक्रम फिलहाल सुर्खियों में है।

उपलब्ध जानकारी के आधार पर पूरी घटना को सिलसिलेवार ढंग से यहां समझाया जा रहा है।

क्या बदला

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्थिति सामने रखी जा रही है। अधिक विवरण मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।

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मुख्य बातें

  • Main development: Unique Temple: भगवान विष्णु के सहस्त्रबाहु मंदिर का 'सास-बहू' नाम पड़ने के पीछे क्या है Fact? जानें पूरा सच
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इस बीच मिली अतिरिक्त जानकारी के अनुसार, आप सभी ने हिंदू देवी-देवताओं के मंदिरों के बारे में तो जरूर सुना होगा। जहां पर विराजमान भगवान की नियमित रूप से पूजा होती है।

अब तक क्या सामने आया है

आप सभी ने हिंदू देवी-देवताओं के मंदिरों के बारे में तो जरूर सुना होगा। जहां पर विराजमान भगवान की नियमित रूप से पूजा होती है। लेकिन क्या आपने सास-बहु के नाम का मंदिर सुना है। यह सुनने में थोड़ा सा अजीब जरूर लग सकता है। लेकिन भारत में एक ऐसा मंदिर है, जिसका नाम सास-बहू मंदिर है। सास-बहू मंदिर का नाम सुनते ही हम सभी के दिमाग में सास-बहू के रिश्ते और उनके बीच होने वाली खट्टी-मीठी नोंकझोंक याद आता है।बता दें कि सास-बहू मंदिर में न तो सास की पूजा होती है और न ही बहू की पूजा होती है। तो ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि इस मंदिर का नाम सास-बहू मंदिर कैसे पड़ा।जानें सहस्त्रबाहु मंदिर का इतिहासराजस्थान के उदयपुर के राजसी शहर से करीब 22 किमी दूर सहस्त्रबाहु मंदिर है। जिसको सास-बहु मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर की स्थापत्य कला 10वीं शताब्दी ईस्वी के आसपास की है।प्रचलित कहानियों के अनुसार, इस मंदिर का मूल नाम सहस्त्रबाहु था, जोकि भगवान विष्णु को समर्पित है। लेकिन समय के साथ यह मंदिर सास-बहु मंदिर के नाम से जाना गया।राजस्थान के नागदा गांव में स्थित इस परिसर के अंदर मुख्य दो मंदिर हैं। विशाल मंदिर सास और छोटा मंदिर बहू। सास मंदिर करीब 10 छोटे-छोटे मंदिरों के समूह से घिरा है। वहीं बहू मंदिर में 5 अन्य छोटे मंदिर हैं। सास के मंदिरों के समक्ष एक मेहराबदार प्रवेश द्वार है। जहां पर कुछ खास मौकों पर श्रीहरि की मूर्ति को रखा जाता है। इसमें 3 अलग दिशाओं में खुलने वाले तीन अन्य द्वार हैं। वहीं चौथा दरबार में आम जनता का जाना मना है।किसने बनवाया था मंदिरमंदिर के इतिहास के बारे में बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण कच्छवाह वंश के राजा महिपाला ने 10 या 11वीं शताब्दी के आसपास कराया था। महिपाला की रानी भगवान श्रीहरि विष्णु की परम भक्त थीं। वहीं राजा भी अपनी पत्नी के प्रति प्रेम और उदार स्वभाव रखता था। इस तरह से भगवान शिव को सम्मान देने के लिए अन्य मंदिर बनवाया। यह मंदिर राजा की बहू के बने भगवान श्रीविष्णु के मंदिर के बगल में था।जब श्रीहरि के मंदिर का निर्माण हुआ, तो इस मंदिर का नाम सहस्त्रबाहु मंदिर रखा गया। सहस्त्रबाहु का अर्थ हजार भुजाओं वाला, जोकि श्रीहरि विष्णु के रूप का प्रतीक था। वहीं समय बीतने के साथ ही इस मंदिर को सास-बहु मंदिर के नाम से जाना गया।

प्रसंग

यह खबर "Unique Temple: भगवान विष्णु के सहस्त्रबाहु मंदिर का 'सास-बहू' नाम पड़ने के पीछे क्या है Fact? जानें पूरा सच" से जुड़ी है। अब तक जो जानकारी सामने आई है, उसका सार है: आप सभी ने हिंदू देवी-देवताओं के मंदिरों के बारे में तो जरूर सुना होगा। जहां पर विराजमान भगवान की नियमित रूप से पूजा होती है। लेकिन क्या आपने सास-बहु के नाम का मंदिर सुना है। यह सुनने में थोड़ा सा अजीब जरूर लग सकता है। लेकिन भारत में एक ऐसा मंदिर है, जिसका नाम सास-बहू मंदिर है। सा

ऐसी खबरों में शुरुआती अपडेट और अंतिम तस्वीर के बीच अक्सर कुछ अंतर होता है। पाठकों के लिए मुख्य घटना, उसका असर और आगे आने वाले अपडेट को अलग-अलग समझना मददगार रहता है।

अपराध, अदालत, राजनीति, स्वास्थ्य या वित्त जैसे संवेदनशील विषयों में स्थिति समय के साथ बदल सकती है, इसलिए इस पर आगे भी अपडेट दिया जाएगा।

पाठकों पर असर

पाठकों के लिए यह खबर इसलिए अहम है क्योंकि यह तेजी से बदलते घटनाक्रम का संक्षिप्त, स्रोत-आधारित और साफ संदर्भ देती है।

NewzQuest दृष्टिकोण

NewzQuest की नजर में यह एक शुरुआती लेकिन महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, जिस पर आने वाले समय में और स्पष्टता आने की उम्मीद है।

आगे क्या देखना है

  • इस मुद्दे पर आने वाला अगला आधिकारिक बयान।
  • इसका आम लोगों और स्थानीय समुदाय पर पड़ने वाला असर।
  • आने वाले दिनों में सामने आने वाले नए घटनाक्रम।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

यह अपडेट पाठकों के लिए इसलिए अहम है क्योंकि यह तेजी से बदलती खबर पर शुरुआती संदर्भ देता है।

NewzQuest सटीक और जिम्मेदार रिपोर्टिंग के लिए प्रतिबद्ध है। अगर आपको इस खबर में कोई त्रुटि नजर आती है, तो कृपया हमें सूचित करें।

आगे क्या

NewzQuest इस विषय पर आने वाले हर नए अपडेट को ट्रैक करता रहेगा।

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