नीम करोली बाबा कौन थे? विराट कोहली और मार्क जुकरबर्ग क्यों खिंचे चले आए ‘हनुमान भक्त’ के दरबार में?
August 30, 2026 | by Bossprp

एक साधारण-सी चादर ओढ़ने वाले संत, हिमालय की शांत वादियां और दुनिया के कुछ सबसे प्रभावशाली नाम—विराट कोहली, मार्क जुकरबर्ग और स्टीव जॉब्स। आखिर ऐसा क्या था नीम करोली बाबा में, जिसने इन लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया?
उत्तराखंड के नैनीताल के पास स्थित कैंची धाम आज भारत के सबसे चर्चित आध्यात्मिक स्थलों में से एक है। लेकिन इसकी लोकप्रियता केवल इसके प्राकृतिक सौंदर्य या मंदिरों की वजह से नहीं है। इसकी पहचान जुड़ी है एक ऐसे संत से, जिन्हें उनके भक्त प्रेम से ‘महाराज जी’ कहते थे—नीम करोली बाबा।
कौन थे नीम करोली बाबा?
नीम करोली बाबा का वास्तविक नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा बताया जाता है। उनका जन्म लगभग 1900 के आसपास उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गांव में हुआ था। युवावस्था में उन्होंने साधु जीवन अपनाया और बाद में गृहस्थ जीवन में भी लौटे। उनके दो पुत्र और एक पुत्री थे।
बाबा की पहचान किसी बड़े धार्मिक प्रदर्शन या भव्य जीवनशैली से नहीं बनी। वे सादगी, भक्ति और सेवा पर जोर देते थे। उनके आध्यात्मिक विचारों का केंद्र भक्ति योग और निस्वार्थ सेवा था। उनके लिए ईश्वर की भक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं थी, बल्कि दूसरों की सेवा भी उसी भक्ति का हिस्सा थी।
उनकी सबसे गहरी आस्था भगवान हनुमान में थी। यही कारण है कि उन्हें अक्सर ‘हनुमान भक्त’ के रूप में याद किया जाता है। कैंची धाम में हनुमान मंदिर भी उनकी आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कैंची धाम कैसे बना आध्यात्मिक केंद्र?
नीम करोली बाबा का सबसे प्रसिद्ध आश्रम उत्तराखंड के कैंची में है। कैंची धाम की स्थापना 1960 के दशक में हुई और धीरे-धीरे यह देश-विदेश से आने वाले आध्यात्मिक साधकों का केंद्र बन गया। बाबा के जीवनकाल के अंतिम वर्षों में यह स्थान उनकी प्रमुख कर्मभूमि रहा।
बाबा का देहावसान 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में हुआ। लेकिन उनके जाने के बाद उनकी लोकप्रियता कम होने के बजाय दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक फैलती चली गई।
स्टीव जॉब्स और नीम करोली बाबा का कनेक्शन
नीम करोली बाबा की कहानी भारत की सीमाओं से बाहर तब और चर्चित हुई, जब दुनिया के महान टेक विजनरी स्टीव जॉब्स से उनका नाम जुड़ा।
1974 में जॉब्स भारत आए थे। वे भारतीय आध्यात्मिकता को समझना चाहते थे और नीम करोली बाबा से मिलने की इच्छा लेकर कैंची धाम पहुंचे। लेकिन यहां पहुंचने तक बाबा का 1973 में निधन हो चुका था। जॉब्स की बाबा से व्यक्तिगत मुलाकात नहीं हो सकी, फिर भी भारत की यह यात्रा उनके जीवन की महत्वपूर्ण आध्यात्मिक यात्राओं में गिनी जाती है।
यहां एक जरूरी बात समझना चाहिए—अक्सर इंटरनेट पर यह दावा किया जाता है कि बाबा ने सीधे स्टीव जॉब्स को Apple बनाने की सलाह दी या Apple के लोगो का विचार दिया। ऐसे दावों को प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्य मानना उचित नहीं है। जॉब्स और कैंची धाम के बीच संबंध वास्तविक था, लेकिन उससे जुड़े कई लोकप्रिय किस्से बाद में किंवदंतियों का रूप ले चुके हैं।
मार्क जुकरबर्ग क्यों पहुंचे कैंची धाम?
नीम करोली बाबा और सिलिकॉन वैली का रिश्ता यहीं खत्म नहीं हुआ।
Facebook के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने 2015 में भारत यात्रा के दौरान कैंची धाम का दौरा किया था। उन्होंने बाद में बताया कि यह यात्रा उन्हें स्टीव जॉब्स की सलाह पर मिली थी।
उस समय Facebook एक कठिन दौर से गुजर रहा था। जुकरबर्ग के अनुसार, जॉब्स ने उन्हें भारत के उस मंदिर में जाने की सलाह दी थी, जहां वे स्वयं कभी गए थे। जुकरबर्ग भारत आए, कैंची धाम पहुंचे और इस अनुभव को अपने लिए महत्वपूर्ण बताया।
यह कहानी इसलिए दिलचस्प है क्योंकि एक ओर Silicon Valley की दुनिया डेटा, एल्गोरिद्म और तकनीक पर आधारित है, वहीं दूसरी ओर कैंची धाम की दुनिया ध्यान, भक्ति, सेवा और आत्मचिंतन की है।
शायद यही विरोधाभास इस कहानी को इतना आकर्षक बनाता है।
विराट कोहली और अनुष्का शर्मा का नीम करोली बाबा से जुड़ाव
भारत में नीम करोली बाबा के प्रति आस्था रखने वाले लोगों में क्रिकेटर विराट कोहली और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा का नाम भी सामने आता है।
जनवरी 2023 में दोनों अपनी बेटी के साथ वृंदावन स्थित नीम करोली बाबा के आश्रम पहुंचे थे। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने बाबा की समाधि के दर्शन किए और कुछ समय ध्यान में बिताया।
यह पहली बार नहीं था जब विराट-अनुष्का की आध्यात्मिक यात्राओं ने लोगों का ध्यान खींचा। उनकी निजी आस्था और आध्यात्मिक जीवन को लेकर सार्वजनिक रूप से बहुत ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है, इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि विराट की क्रिकेट सफलता का सीधा संबंध नीम करोली बाबा से है।
लेकिन इतना जरूर है कि बाबा और उनके आश्रम के प्रति उनकी रुचि ने एक बार फिर करोड़ों लोगों का ध्यान कैंची धाम और नीम करोली बाबा की ओर खींच दिया।
आखिर क्यों आकर्षित करते हैं नीम करोली बाबा?
शायद इसका उत्तर उनकी प्रसिद्धि में नहीं, बल्कि उनकी शिक्षाओं में छिपा है।
नीम करोली बाबा का संदेश बहुत जटिल नहीं था—भक्ति, प्रेम, सेवा और अहंकार से दूरी।
आज की दुनिया में सफलता अक्सर पैसे, पद, प्रसिद्धि और प्रभाव से मापी जाती है। लेकिन बाबा की आध्यात्मिक परंपरा व्यक्ति को भीतर देखने के लिए प्रेरित करती है।
यही बात शायद उन लोगों को भी आकर्षित करती है जो जीवन में बहुत कुछ हासिल करने के बावजूद किसी स्तर पर मानसिक शांति, अर्थ या दिशा की तलाश करते हैं।
विराट के लिए यह आस्था का विषय हो सकता है। जुकरबर्ग के लिए यह कठिन समय में आत्मचिंतन का अवसर रहा। जॉब्स के लिए यह आध्यात्मिक खोज का हिस्सा था।
तीनों की यात्राओं के कारण अलग हो सकते हैं, लेकिन मंजिल एक ही तरह के सवालों की ओर जाती दिखाई देती है—मैं कौन हूं? मैं क्या कर रहा हूं? और मेरी सफलता का असली अर्थ क्या है?
‘चमत्कार’ से ज्यादा महत्वपूर्ण था उनका संदेश
नीम करोली बाबा से जुड़े अनेक चमत्कारों की कहानियां उनके भक्तों में प्रचलित हैं। लेकिन उनके जीवन को समझने के लिए केवल चमत्कारों पर ध्यान देना शायद उनकी वास्तविक लोकप्रियता को छोटा कर देता है।
उनके अनुयायियों के लिए उनकी सबसे बड़ी सीख थी कि आध्यात्मिकता केवल मंदिर में बैठने का नाम नहीं है। दूसरों के प्रति प्रेम और सेवा भी ईश्वर की भक्ति का रास्ता है।
उनकी यही सोच भारत से निकलकर अमेरिका और दुनिया के दूसरे हिस्सों तक पहुंची। उनके पश्चिमी शिष्यों में राम दास और लैरी ब्रिलियंट जैसे नाम भी शामिल रहे।
एक संत, जिसकी प्रसिद्धि उसके बाद बढ़ी
नीम करोली बाबा ने अपने जीवनकाल में न कोई बड़ा साम्राज्य बनाया, न किसी राजनीतिक शक्ति का सहारा लिया। फिर भी उनके निधन के दशकों बाद उनका नाम दुनिया के सबसे सफल लोगों के साथ लिया जाता है।
शायद यही उनकी कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू है।
एक तरफ विराट कोहली का क्रिकेट मैदान, दूसरी तरफ मार्क जुकरबर्ग की डिजिटल दुनिया और तीसरी तरफ स्टीव जॉब्स की तकनीकी क्रांति—इन सबके बीच एक छोटी-सी कड़ी है: कैंची धाम और नीम करोली बाबा।
और शायद बाबा की लोकप्रियता का रहस्य यही है कि उन्होंने सफलता का कोई फॉर्मूला नहीं दिया। उन्होंने उससे कहीं कठिन चीज की ओर इशारा किया—अपने भीतर शांति खोजने की ओर।
कैंची धाम की पहाड़ियों में आज भी भक्त हनुमान जी के दर्शन करने और नीम करोली बाबा की स्मृति से जुड़ने आते हैं। बाबा भौतिक रूप से इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके नाम से जुड़ी भक्ति, सेवा और प्रेम की परंपरा आज भी जीवित है।
शायद यही वजह है कि दशकों बाद भी लोग पूछते हैं—नीम करोली बाबा आखिर कौन थे?
और शायद इसका सबसे सरल उत्तर यही है—
एक ऐसे संत, जिन्होंने लोगों को ईश्वर तक पहुंचने से पहले इंसान तक पहुंचना सिखाया।
RELATED POSTS
View all
