Updated 13 जुलाई 2026 2:07 अपराह्न

संभल, मथुरा और ज्ञानवापी पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मध्यस्थता से करें समाधान, हिंदू-मुस्लिम पक्षकार बोले- सुनवाई जरूरी
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संभल, मथुरा और ज्ञानवापी पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मध्यस्थता से करें समाधान, हिंदू-मुस्लिम पक्षकार बोले- सुनवाई जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने संभल, मथुरा और वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर प्रस्ताव दिया कि हिंदू-मुस्लिम पक्ष मध्यस्थता के जरिए समाधान निकालें, लेकिन दोनों ही पक्षों ने इस पर असहमति जताई. उन्होंने कहा कि जटिल कानूनी सवालों को देखते हुए कोर्ट में सुनवाई जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट ने 21 से 23 अगस्त के बीच 'समाधान समारोह' के नाम से आयोजित हो रहे लोक अदालत कार्यक्रम के लिए इन मामलों के पक्षकारों को भी नोटिस भेजा था, लेकिन सभी ने असहमति जता दी है. समाधान समारोह में सुप्रीम कोर्ट में लंबित उन हजारों मुकदमों का निपटारा किया जाना है, जिनमें आपसी बातचीत या सहमति से समाधान संभव हो सकता है. इसके लिए देश भर के पक्षकारों को सूचना भेजी जा रही है. ऐसी ही सूचना मंदिर-मस्जिद विवाद के पक्षकारों को भी भेजी गई थी. ज्ञानवापी मस्जिद का मामला क्या है? ज्ञानवापी का मामला ज्ञानवापी परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर परस्पर विरोधी दावों से जुड़े एक चल रहे दीवानी अदालती मुकदमे से उत्पन्न हुआ है. हिंदू पक्ष ने कहा है कि सोमनाथ व्यास के परिवार द्वारा मस्जिद के तहखाने में 1993 तक हिंदू प्रार्थनाएं की जाती थीं. वहीं मुस्लिम पक्ष ने इस दावे का विरोध किया है और यह तर्क दिया है कि मस्जिद की इमारत पर मुसलमानों का हमेशा से ही अधिकार रहा है. ज्ञानवापी परिसर को लेकर मुख्य विवाद हिंदू पक्ष के इस दावे से जुड़ा है कि इस जमीन पर स्थित प्राचीन मंदिर का एक हिस्सा 17वीं शताब्दी में औरंगजेब के शासनकाल के दौरान नष्ट कर दिया गया था.

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By पाराशर

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