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यादों के झरोखे में नॉर्थ और साउथ ब्लॉक, जहां कभी देश की तकदीर लिखी जाती थी!
एनशॉर्ट्स
यादों के झरोखे में नॉर्थ और साउथ ब्लॉक, जहां कभी देश की तकदीर लिखी जाती थी!
हर उरूज को ज़वाल है… यूं तो ये फ़िक़रा ज़बान-ए-ज़द-ए-आम (हरेक की ज़बान पर) है, जो हमें याद दिलाता रहता है कि इस दुनिया में हर उरूज को ज़वाल है… यानी हर ऊंचाई का पतन निश्चित है. अभी चंद साल ही गुज़रे हैं, जब देश का काउंसिल हाउस, जिसे हम अब पुराने संसद भवन के तौर पर याद करते हैं, इतिहास का हिस्सा बन चुका है. करीब 75 सालों तक यह आज़ाद भारत की जनता की महापंचायत का केंद्र रहा, जहां देश को दिशा देने वाले कानून बने और हर समस्या के समाधान पर बहसें हुईं. गौरवशाली वर्तमान का अतीत में बदलना एक सतत प्रक्रिया है. यादों के झरोखे में नॉर्थ और साउथ ब्लॉक इसी क्रम में नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक भी इतिहास के नए सफर का हिस्सा बन रहे हैं. प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से लेकर मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक साउथ ब्लॉक प्रधानमंत्री कार्यालय का केंद्र रहा.

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