Boxing Coach Chhote Lal Yadav को द्रोणाचार्य पुरस्कार: Mary Kom के करियर को नई ऊंचाई देने वा…
August 22, 2026 | by Amina Yusuf

Boxing Coach Chhote Lal Yadav को द्रोणाचार्य पुरस्कार: Mary Kom के करियर को नई ऊंचाई देने वाले रणनीतिकार का सफर। यह घटनाक्रम फिलहाल सुर्खियों में है।
जो भी जानकारी अब तक सामने आई है, उसे स्पष्ट और सरल भाषा में यहां पेश किया जा रहा है।
क्या बदला
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्थिति सामने रखी जा रही है। अधिक विवरण मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।
मुख्य बातें
- Main development: Boxing Coach Chhote Lal Yadav को द्रोणाचार्य पुरस्कार: Mary Kom के करियर को नई ऊंचाई देने वाले रणनीतिकार का सफर
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इस बीच मिली अतिरिक्त जानकारी के अनुसार, दिग्गज एमसी मैरी कॉम के करियर को आगे बढ़ाने से लेकर जैस्मीन लैंबोरिया को विश्व चैंपियन में बदलने तक, छोटे लाल यादव ने प्रत्येक मुक्केबाज की जरूरतों को समझकर अपना कोचिंग करियर बनाया है, एक ऐसा दृष्टिकोण जिसने उन्हें प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य पु सेना में कार्यरत 38 वर्षीय छोटे लाल काफी हद तक चर्चाओं से दूर रहे जबकि उनसे कोचिंग लेने वाले मुक्केबाज सुर्खियों में रहे।
अब तक क्या सामने आया है
दिग्गज एमसी मैरी कॉम के करियर को आगे बढ़ाने से लेकर जैस्मीन लैंबोरिया को विश्व चैंपियन में बदलने तक, छोटे लाल यादव ने प्रत्येक मुक्केबाज की जरूरतों को समझकर अपना कोचिंग करियर बनाया है, एक ऐसा दृष्टिकोण जिसने उन्हें प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य पुरस्कार दिलाया है। सेना में कार्यरत 38 वर्षीय छोटे लाल काफी हद तक चर्चाओं से दूर रहे जबकि उनसे कोचिंग लेने वाले मुक्केबाज सुर्खियों में रहे। मैरी कॉम की वापसी, जैस्मीन का विश्व खिताब तथा साक्षी चौधरी और अरुंधति चौधरी के राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक उस यात्रा के निर्णायक मील के पत्थर हैं जो तब शुरू हुई जब चोट ने यादव को रिंग से कोचिंग की तरफ मोड़ दिया। यादव ने पीटीआई से कहा, ‘‘मैं बहुत खुश हूं, लेकिन मुझे यहीं नहीं रुकना है। मुझे और मेहनत करनी होगी। मेरा लक्ष्य है कि मेरे मुक्केबाज लॉस एंजिलिस ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतें।’’ एक मुक्केबाज के रूप में यादव 2001 से 2012 तक राष्ट्रीय टीम का हिस्सा रहे और वह सब-जूनियर, जूनियर और सीनियर वर्ग में भी खेले। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भाग लिया। यादव ने एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता और 2008 से 2010 तक लगातार तीन वर्षों तक फीदरवेट वर्ग में राष्ट्रीय चैंपियन रहे। उन्हें 2000 में वाराणसी से पुणे स्थित सेना की ‘बॉयज़ स्पोर्ट्स कंपनी’ में लाया गया था और वह 2005 में सेना में शामिल हो गए। लेकिन 2012 में पीठ की चोट ने मुक्केबाज के रूप में ओलंपिक में भाग लेने की उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इसके बाद उन्होंने मुक्केबाजी तो नहीं छोड़ी, लेकिन अपनी भूमिका बदल ली। कोचिंग से उनका पहला गंभीर परिचय उसी साल हुआ जब उन्हें मैरी कॉम की मदद करने के लिए कहा गया। यह उनके कोचिंग करियर का महत्वपूर्ण मोड़ था। यादव ने 2014 में पटियाला स्थित राष्ट्रीय खेल संस्थान से कोचिंग डिप्लोमा पूरा किया और 2017 तक वह मैरी कॉम के साथ पूर्णकालिक रूप से काम करते रहे। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे प्रशिक्षण लेने से पहले ही वह चैंपियन थी। मेरी सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि एक दिग्गज खिलाड़ी और चैंपियन को चैंपियन कैसे बनाए रखा जाए।’’ उस समय तक मैरी कॉम पांच बार की विश्व चैंपियन और ओलंपिक पदक विजेता बन चुकी थीं। यादव का काम उन्हें चैंपियन बनना सिखाना नहीं, बल्कि उन्हें चैंपियन बनाए रखने के तरीके खोजना था। उन्होंने ‘स्मार्ट ट्रेनिंग’ की पद्धति अपनाई जिसमें उम्र और शारीरिक जरूरतों के अनुसार उनका कार्यभार प्रबंध करना था। यादव ने कहा, ‘‘‘उस समय यह मेरे लिए एक चुनौती थी, मुझे पूरी तरह से विश्वास नहीं था कि कारगर साबित होगी या नहीं लेकिन यह कारगर साबित हुई।’’ इसका जल्द ही सकारात्मक परिणाम सामने आया। मैरी कॉम ने 2018 में एशियाई चैंपियनशिप जीती। उन्होंने उसी वर्ष राष्ट्रमंडल खेलों और विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीते। उन्होंने कहा, ‘‘एशियाई खेल 2014 में स्वर्ण पदक जीतने के बाद से मैरी ने किसी बड़े टूर्नामेंट में कोई जीत हासिल नहीं की थी और ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाई नहीं कर पाई थीं। इसलिए इस जीत से मुझे बहुत खुशी मिली।’’ अपनी कोचिंग पद्धति के बारे में यादव ने कहा, ‘‘मैं हर मुक्केबाज के लिए व्यक्तिगत प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करता हूं।’’ इसके बाद उन्होंने अन्य महिला मुक्केबाजों को भी प्रशिक्षण देना शुरू किया। उनके मार्गदर्शन में जैस्मीन पिछले साल विश्व चैंपियन बनीं, जबकि साक्षी और अरुंधति ने इस महीने की शुरुआत में राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीते। जैस्मीन ने कहा, ‘‘छोटे सर को महिला मुक्केबाजों के बारे में सब कुछ पता है। प्रशिक्षण कैसे देना है, रिकवरी कैसे करनी है। वे बहुत खुले विचारों वाले हैं, इसलिए हम उनसे बेझिझक बात कर पाते हैं।
प्रसंग
यह खबर "Boxing Coach Chhote Lal Yadav को द्रोणाचार्य पुरस्कार: Mary Kom के करियर को नई ऊंचाई देने वाले रणनीतिकार का सफर" से जुड़ी है। अब तक जो जानकारी सामने आई है, उसका सार है: दिग्गज एमसी मैरी कॉम के करियर को आगे बढ़ाने से लेकर जैस्मीन लैंबोरिया को विश्व चैंपियन में बदलने तक, छोटे लाल यादव ने प्रत्येक मुक्केबाज की जरूरतों को समझकर अपना कोचिंग करियर बनाया है, एक ऐसा दृष्टिकोण जिसने उन्हें प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य पुरस्कार दिलाया है। सेना में कार्यरत 38 वर
ऐसी खबरों में शुरुआती अपडेट और अंतिम तस्वीर के बीच अक्सर कुछ अंतर होता है। पाठकों के लिए मुख्य घटना, उसका असर और आगे आने वाले अपडेट को अलग-अलग समझना मददगार रहता है।
अपराध, अदालत, राजनीति, स्वास्थ्य या वित्त जैसे संवेदनशील विषयों में स्थिति समय के साथ बदल सकती है, इसलिए इस पर आगे भी अपडेट दिया जाएगा।
खेल खबरों में चयन, फिटनेस, कप्तानी, कार्यक्रम और टीम रणनीति जैसे पहलू तेजी से बदल सकते हैं। इसलिए ड्राफ्ट में तत्काल अपडेट के साथ-साथ आगे की संभावित दिशा भी साफ होनी चाहिए।
पाठकों पर असर
खेल पाठकों के लिए इसका असर टीम चयन, खिलाड़ी भूमिका, टूर्नामेंट रणनीति और आने वाले मुकाबलों की तैयारी से जुड़ सकता है। इसलिए केवल हेडलाइन नहीं, बल्कि स्रोतों में दिख रहे संकेतों को भी समझना जरूरी है।
NewzQuest दृष्टिकोण
NewzQuest की नजर में यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में टीम रणनीति और प्रदर्शन पर असर डाल सकता है, इसलिए इस पर नजर बनाए रखना जरूरी है।
आगे क्या देखना है
- आधिकारिक टीम या बोर्ड की ओर से आने वाला अगला बयान।
- आगामी मुकाबलों के कार्यक्रम और तैयारी पर असर।
- खिलाड़ियों और प्रशंसकों की प्रतिक्रिया।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
खेल से जुड़ी ऐसी खबरें खिलाड़ियों, टूर्नामेंट और प्रशंसकों के लिए सीधे असर वाली होती हैं, इसलिए नए अपडेट पर नजर रखना जरूरी है।
NewzQuest सटीक और जिम्मेदार रिपोर्टिंग के लिए प्रतिबद्ध है। अगर आपको इस खबर में कोई त्रुटि नजर आती है, तो कृपया हमें सूचित करें।
आगे क्या
NewzQuest इस विषय पर आने वाले हर नए अपडेट को ट्रैक करता रहेगा।
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