एनशॉर्ट्स
अरावली से जुड़ा 100 मीटर विवाद क्या है, मामला सुप्रीम कोर्ट कैसे पहुंच गया? 10 बड़ी बातें
सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की 'परिभाषा' और उससे जुड़े 100 मीटर के फॉर्मूले वाले विवाद के खिलाफ याचिका मंजूर कर ली है. यह याचिका हरियाणा के रिटायर्ड वन अधिकारी आरपी बलवान ने दायर की है. कोर्ट ने 17 दिसंबर को अपने आदेश में केंद्र सरकार, हरियाणा और राजस्थान सरकारों तथा पर्यावरण मंत्रालय (MoEFCC) से इस याचिका पर जवाब मांगा है. 100 मीटर से छोटी पहाड़ियों को खतरा यह मामला पुराने टीएन गोदावरमन थिरुमुलपाद बनाम यूनियन ऑफ इंडिया केस से जुड़ा है, जिसमें 1996 में सुप्रीम कोर्ट ने 'वन' की व्यापक परिभाषा दी थी. नवंबर 2025 में कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय की कमेटी की सिफारिश को मानते हुए अरावली पहाड़ियों की एक समान परिभाषा तय की थी. इसके तहत स्थानीय स्तर से 100 मीटर या उससे ज्यादा ऊंची पहाड़ियां ही अरावली मानी जाएंगी, साथ ही उनकी ढलान और आसपास की जमीन भी इसी दायरे में आएंगी. लेकिन याचिकाकर्ता का कहना है
तकनीकी रूप से संवर्धित सामग्री, सार्वजनिक हित में उचित उपयोग के तहत प्रस्तुत।