एनशॉर्ट्स
सुप्रीम कोर्ट का सुझाव: उम्र की पुष्टि के बाद ही दी जाए ऑनलाइन कंटेंट तक पहुंच, आपत्तिजनक सामग्री पर नियंत्रण के लिए स्वायत्त संस्था का हो गठन
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इंटरनेट पर उपलब्ध अश्लील या वयस्क प्रकृति की सामग्री से बच्चों को दूर रखने के लिए आधार नंबर से उम्र की पुष्टि करने पर विचार किया जाना चाहिए. कोर्ट ने यह टिप्पणी उस मामले को सुनते हुए की जिसमें वह कॉमेडियंस और पॉडकास्टर्स की तरफ से पेश की जा रही आपत्तिजनक सामग्री के मसले पर विचार कर रहा है. सुप्रीम कोर्ट में यह मामला इस साल फरवरी में पहुंचा था. 'इंडियाज गॉट लैटेंट' शो में की गई अश्लील कॉमेडी के लिए कई राज्यों में एफआईआर दर्ज होने के बाद कॉमेडियन रणवीर इलाहाबादिया सुप्रीम कोर्ट आए थे. इसी तरह के मामले में कॉमेडियन आशीष चंचलानी, अपूर्वा मखीजा, जसप्रीत सिंह और समय रैना पर भी केस हुए. उन्होंने भी राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने रणवीर को गिरफ्तारी से राहत दी, लेकिन कड़ी फटकार लगाने के बाद. 18 फरवरी
तकनीकी रूप से संवर्धित सामग्री, सार्वजनिक हित में उचित उपयोग के तहत प्रस्तुत।