0 1 min 5 mths
एनशॉर्ट्स
EXPLAINED: बिहार में बाहुबल के दम पर होगा चुनाव! क्या तमंचे और मर्डर से तय होगी जीत, कैसे लौट रहा 1990 का 'जंगलराज'?
31 जनवरी 1990… मुजफ्फरपुर के छाता चौक में शाम करीब 5 बजे सरस्वती पूजा का त्योहार चल रहा था. बाजार में मां सरस्वती की मूर्तियां बिक रहीं थीं और बच्चे किताबें पूज रहे थे. तभी 45 साल का दबंग नेता चंदेश्वर सिंह अपने 10-12 लोगों के काफिले के साथ एक चाय की टपरी पर रुका. इस दौरान बाहुबली अशोक सम्राट की गैंग आ पहुंची. अशोक के हाथ में सोवियत सेना से चोरी होकर भारत पहुंची AK-47 राइफल थी. अचानक दोनों गुटों में फायरिंग शुरू हो गई. "ट्र-ट्र-ट्र" की आवाज से बाजार गूंज उठा और बिहार में पहली बार AK-47 चली. चंदेश्वर को 12 गोलियां लगीं और उसकी मौत हो गई. यह हमला चुनावी रंजिश से जुड़ा था क्योंकि चंदेश्वर जनता दल के टिकट पर मुजफ्फरपुर सदर से चुनाव लड़ रहा था और अशोक उनके वोट बैंक को तोड़ना चाहता था. ऐसा ही कुछ बिहार में फिर दोहराया जा रहा है. 30

तकनीकी रूप से संवर्धित सामग्री, सार्वजनिक हित में उचित उपयोग के तहत प्रस्तुत।

Listen:

↓ Download Audio

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.