’14 साल जेल में गुजारने के बाद रद्द हुई सजा’, जज की खामियां बताते हुए केरल HC ने पलटा फैसला


एनशॉर्ट्स
'14 साल जेल में गुजारने के बाद रद्द हुई सजा', जज की खामियां बताते हुए केरल HC ने पलटा फैसला
केरल हाईकोर्ट ने 14 साल जेल में बिता चुके शख्स की आजीवन कारावास की सजा यह कहते हुए रद्द कर दी कि उसको निष्पक्ष सुनवाई से वंचित रखा गया. इस शख्स को हत्या के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. कोर्ट का कहना है कि सेशन जज ने पब्लिक प्रोसेक्यूटर की अनुपस्थिति में खुद मुख्य जिरह की और आरोपी का पक्ष रखने के लिए कोई सक्षम वकील भी नहीं था. कई गवाहों से अभियुक्तों की अनुपस्थिति में पूछताछ की गई. जस्टिस राजा विजयराघवन और जस्टिस के. वी. जयकुमार की बेंच ने पाया कि आरोपी को लंबे समय तक हिरासत में रखा गया और उसे ऐसे मुकदमे का सामना करना पड़ा, जो टुकड़ों-टुकड़ों में चलाया गया था. कोर्ट ने सेशन कोर्ट की सुनवाई के दौरान जज की खामियों को उजागर किया और कहा कि मुकदमे की एक महत्वपूर्ण अवधि के दौरान आरोपी का प्रतिनिधित्व किसी सक्षम वकील ने
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