एनशॉर्ट्स
सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: क्लाइंट को दी गई सलाह और कानूनी सहायता के लिए वकील से नहीं हो सकती पूछताछ, दस्तावेजों की जांच के लिए कोर्ट की अनुमति जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अपने मुवक्किल को कानूनी सेवा दे रहे वकील को जांच एजेंसी पूछताछ का समन नहीं भेज सकती. वकील को समन सिर्फ उन्हीं मामलों में भेजा जा सकता है जो भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 132 के अपवादों में आते हैं. वकील को समन एसपी रैंक के अधिकारी की अनुमति से ही भेजा जा सकता है. वकील इस समन को कोर्ट में चुनौती दे सकता है. धारा 132 के अपवादभारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 132 के तहत वकील और क्लाइंट के बीच का संबंध विशिष्ट श्रेणी में आता है. किसी वकील को उसके क्लाइंट की तरफ से दी गई जानकारी को साझा करने के लिए नहीं कहा जा सकता. एक वकील उन जानकारियों को सिर्फ अपने क्लाइंट की अनुमति से ही साझा कर सकता है. इस धारा में अपवाद यह है कि अगर वकील को अपने लिए नियुक्त करने के बाद मुवक्किल ने उससे आपराधिक कृत्य
तकनीकी रूप से संवर्धित सामग्री, सार्वजनिक हित में उचित उपयोग के तहत प्रस्तुत।