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सरकार की आलोचना लोकतंत्र का अधिकार, यूएपीए की संवैधानिकता पर दिल्ली हाई कोर्ट में अहम सुनवाई
दिल्ली हाई कोर्ट में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून यानी Unlawful Activities (Prevention) Act की कुछ धाराओं को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई. यह याचिका फाउंडेशन ऑफ मीडिया ने दाखिल की है. सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील ने अदालत से कहा कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना पूरी तरह जायज है. जब तक वह हिंसा को बढ़ावा नहीं देती. दी ये दलील?उन्होंने दलील दी कि केवल सरकार की नीतियों की आलोचना को देश के खिलाफ असंतोष मानकर यूएपीए लगाना गलत है. उनके मुताबिक डिसअफेक्शन यानी असंतोष शब्द कानून में साफ परिभाषित नहीं है, जिससे खासकर पत्रकारों के बीच डर और अनिश्चितता का माहौल बनता है. UAPA की कुछ धाराएं बहुत अस्पष्ट हैं और नागरिकों की आजादी को सीमित करती हैं. दिल्ली हाई कोर्ट में चल रही मामले की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और जस्टिस तेजस करिया की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है. याचिकाकर्ताओं
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