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रूस के खिलाफ फिर हो रही साजिश! पुतिन की भारत दौरे के बाद वापसी, क्यों छटपटा रहे यूरोपीय देश?
यूक्रेन युद्ध के बीच रूस पर दबाव बढ़ाने की कोशिशें एक बार फिर तेज होने वाली हैं. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक G7 और यूरोपीय संघ अब ऐसे कदम पर विचार कर रहे हैं, जो रूस की तेल आय को पिछले सभी प्रतिबंधों से कहीं ज्यादा प्रभावित कर सकता है. यह प्रस्ताव पश्चिमी देशों की समुद्री सेवाओं टैंकर, बीमा और शिपिंग को रूस के तेल व्यापार से पूरी तरह हटाने से जुड़ा है. अगर यह लागू होता है तो वैश्विक ऊर्जा राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. रूस भले ही युद्ध के बीच नए रास्ते तैयार कर चुका हो, पर अभी भी उसके लगभग एक-तिहाई तेल की ढुलाई यूरोपीय समुद्री देशों के जहाजों पर टिकी है. ग्रीस, माल्टा और सायप्रस के विशाल टैंकर बेड़ों के जरिए बड़ी मात्रा में कच्चा तेल भारत और चीन पहुंच रहा है. प्रस्तावित प्रतिबंध लागू होते ही ये सेवाएं रुक जाएंगी और रूस
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