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भारत जैसा संसार में दूसरा नहीं विविधता में एकता का अद्भुत मॉडल- सद्गुरु
सद्गुरु: देश आम तौर पर नस्ल, धर्म, भाषा या जातीयता के आधार पर बनते और एक साथ जुड़े रहते हैं. समानता राष्ट्र निर्माण का फ़ॉर्मूला है, लेकिन भारत इस आम प्रवृत्ति को नकारता है. हमने राष्ट्र का निर्माण करने में गर्व महसूस किया, लोगों की समानता पर नहीं, बल्कि लोगों की विविधता पर. अगर आप पूरे देश में घूमें, तो हर पचास किलोमीटर पर लोगों की अलग-अलग भाषाएं और जीवनशैलियां हैं. भारत को एक मनुष्य – भारत माता के रूप में पहचाना गया, जहां ये सारे अलग- अलग हिस्से एक शरीर के अंग थे. हम उम्मीद नहीं करते कि छोटी उंगली और नाक एक ही तरह से काम करें, लेकिन वे एक साथ हैं. एक संगठित एकता थी जिसे इस संस्कृति ने बहुत सावधानी से पाला-पोसा, और एक बहुत मजबूत आध्यात्मिक धागे से बांधा. एक गणतंत्र का जन्म भारत की भूमि हज़ारों सालों से एक सांस्कृतिक पहचान रही है, लेकिन 1950
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