पेरेंटिंग- 10 साल का बेटा कोई काम खुद नहीं करता:चाहता है, सबकुछ कोई और करके दे, उसे घर के का…

सवाल- मैं पटना से हूं। मेरा 10 साल का बेटा है। मैंने नोटिस किया है कि वह अपने छोटे-छोटे काम भी खुद नहीं करता। पानी चाहिए तो किसी को बुलाएगा, स्कूल बैग लगाना हो तो मेरी मदद मांगेगा। मैं उसे अपने कामों से लेकर घर के छोटे-छ
पेरेंटिंग- 10 साल का बेटा कोई काम खुद नहीं करता:चाहता है, सबकुछ कोई और करके दे, उसे घर के काम करना, जिम्मेदार होना कैसे सिखाएं?। यह घटनाक्रम फिलहाल सुर्खियों में है।
जो भी जानकारी अब तक सामने आई है, उसे स्पष्ट और सरल भाषा में यहां पेश किया जा रहा है।
क्या बदला
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्थिति सामने रखी जा रही है। अधिक विवरण मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।
मुख्य बातें
- Main development: पेरेंटिंग- 10 साल का बेटा कोई काम खुद नहीं करता:चाहता है, सबकुछ कोई और करके दे, उसे घर के काम करना, जिम्मेदार होना कैसे सिखाएं?
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इस बीच मिली अतिरिक्त जानकारी के अनुसार, Patna expert parenting advice for teaching 10-year-old kids responsibility and independence at home. मैंने नोटिस किया है कि वह अपने छोटे-छोटे काम भी खुद नहीं करता।
अब तक क्या सामने आया है
सवाल- मैं पटना से हूं। मेरा 10 साल का बेटा है। मैंने नोटिस किया है कि वह अपने छोटे-छोटे काम भी खुद नहीं करता। पानी चाहिए तो किसी को बुलाएगा, स्कूल बैग लगाना हो तो मेरी मदद मांगेगा। मैं उसे अपने कामों से लेकर घर के छोटे-छोटे काम सिखाना चाहती हूं। लेकिन मैं जब भी उसे कोई काम बोलती हूं तो उसकी दादी टोक देती हैं। कहती हैं, "वो अभी वह बच्चा है। उससे काम क्यों करवा रही हो?" उन्हें लगता है कि उसे सिर्फ पढ़ाई और खेल पर ध्यान देना चाहिए। मेरा सवाल ये है कि बच्चों से घर के काम करवाने की सही उम्र क्या है? एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर जवाब- सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। सबसे पहले मैं आपको यह कहना चाहूंगी कि बच्चों को उम्र के अनुसार छोटी-छोटी जिम्मेदारियां देना बिल्कुल भी गलत नहीं है। लेकिन यहां एक बात स्पष्ट करना जरूरी है कि ‘जिम्मेदारी सिखाने’ और ‘बच्चे से काम करवाने’ में एक बारीक अंतर है। जीवन के लिए जरूरी बुनियादी स्किल हमें यह समझना होगा कि कुछ काम जीवन जीने की बुनियादी जरूरतों से जुड़े होते हैं। जैसे- इसलिए खाना बनाना, कपड़े धोना, अपना कमरा व्यवस्थित रखना और साफ-सफाई जैसे काम हर किसी को आने चाहिए। ये कोई विशेष जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर जीवन जीने के लिए जरूरी बुनियादी स्किल हैं। बच्चों को बचपन से इन कामों से परिचित कराने का मतलब उनसे घर का बोझ उठवाना नहीं है। इसका उद्देश्य उन्हें धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बनाना है। उन्हें यह सिखाना है कि अपनी जरूरतों का ख्याल रखना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। जब बच्चे उम्र के अनुसार छोटे-छोटे काम करना सीखते हैं, तो वे ये गुण भी सीखते हैं– यही गुण आगे चलकर उन्हें एक आत्मविश्वासी और जिम्मेदार इंसान बनाते हैं। जिम्मेदारी में भेदभाव क्यों दुर्भाग्य से हमारे समाज में आज भी घर के कामों को लड़कियों की जिम्मेदारी माना जाता है। इसलिए ज्यादातर घरों में बचपन से लड़कों को घरेलू कामों से दूर रखा जाता है। इसका असर आगे चलकर दिखता है, जब वे अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहते हैं। जबकि आत्मनिर्भर जीवन के लिए लड़के और लड़कियां, दोनों को समान रूप से घर की जिम्मेदारियां निभाना सिखाना चाहिए। आपने बताया कि आपकी सास पोते से काम कराने नहीं देतीं। उनकी सोच पुराने जमाने की है। अब दुनिया बदल गई है। आज की दुनिया में सर्वाइव करने के लिए लड़के–लड़कियां, दोनों को घर के काम सीखना और जिम्मेदारियां निभाना आना चाहिए। समझें काम और जिम्मेदारी में फर्क काम का मतलब आदेश का पालन होता है, जबकि जिम्मेदारी उस काम के प्रति जवाबदेही होती है। इसे उदाहरण से समझिए- 1. काम- ‘’दरवाजा लॉक कर दो।‘’ जिम्मेदारी- ‘’आज से रोज रात में सोने से पहले गेट में ताला लगाने की जिम्मेदारी तुम्हारी है।‘’ 2. काम- ‘’पौधों में पानी डाल दो।‘’ जिम्मेदारी- ‘’इस महीने घर के पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी तुम्हारी है।‘’ 3. काम- ‘’कूड़ेदान बाहर रख आओ।‘’ जिम्मेदारी- ‘’रोज सुबह कूड़ा गाड़ी आने से पहले घर का कूड़ा बाहर रखने की जिम्मेदारी तुम्हारी है।‘’ ऐसी छोटी-छोटी जिम्मेदारियों से बच्चे में ‘दायित्वबोध’ की भावना विकसित होती है। साथ ही वे भविष्य में जीवन की किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार होते हैं। बच्चों को जिम्मेदारी देने के सभी फायदे ग्राफिक में देखिए- जिम्मेदारियों से बढ़ता आत्मविश्वास बच्चों से घर के काम करवाने को लेकर साइकोलॉजी में काफी रिसर्च हुई हैं। ज्यादातर रिसर्च बताती हैं कि छोटी-छोटी जिम्मेदारियां बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन, जिम्मेदारी और प्रॉब्लम-सॉल्विंग स्किल डेवलप करती हैं। लेकिन ध्यान रखें कि बच्चों से उनकी क्षमता से ज्यादा काम न करवाएं। ये काम बच्चे को बनाएंगे जिम्मेदार बच्चों से काम कराने का उद्देश्य उनमें जिम्मेदारी की आदत विकसित करना है। इसके लिए उन्हें कुछ छोटे-छोटे काम दे सकते हैं। ग्राफिक में ऐसे कामों की लिस्ट देखिए- कोशिशों की तारीफ कई बार माता-पिता बच्चों को सिर्फ आदेश देते हैं, जिससे वे काम से से बचने लगते हैं। इसलिए आदेश देने की बजाय उनके रोल मॉडल बनें और उनकी कोशिशों की तारीफ करें। इससे बच्चों में उत्साह बढ़ता है और वे जिम्मेदारी लेना सीखते हैं। बच्चों को जिम्मेदारी सिखाने के कुछ आसान तरीके ग्राफिक में देखिए- बच्चा काम करने से मना करे तो क्या करें? कई बच्चे शुरुआत में जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश करते हैं। ऐसे में बार-बार डांटने या लेक्चर देने की बजाय धैर्य रखें। काम को मजेदार बनाएं। उदाहरण के लिए- इससे बच्चे में काम के प्रति इंटरेस्ट पैदा होगा। पेरेंट्स की कॉमन गलतियां कई बार माता-पिता अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां करते हैं, जिनसे बच्चा जिम्मेदारी सीखने की बजाय निराश हो जाता है। इसलिए पेरेंट्स को इन गलतियों से बचना चाहिए– काम और बचपन के बीच संतुलन जरूरी कुछ परिवारों में बच्चों पर जरूरत से ज्यादा जिम्मेदारियां डाल दी जाती हैं। वहीं कुछ परिवारों में बच्चों को कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाती। दोनों ही स्थितियां सही नहीं हैं। काम और बचपन के बीच संतुलन जरूरी है। बच्चों को खेलने, दोस्तों के साथ समय बिताने, पढ़ने और अपनी पंसदीदा एक्टिविटीज के लिए समय मिलना चाहिए। अंत में यही कहूंगी बच्चों को छोटी-छोटी जिम्मेदारियां देना उनकी पर्सनैलिटी डेवलपमेंट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे उनमें आत्मनिर्भरता, अनुशासन, सहयोग और जिम्मेदारी जैसे जीवनभर काम आने वाले गुण विकसित होते हैं। याद रखिए, आपका लक्ष्य बच्चे से काम करवाना नहीं, बल्कि उसे जीवन के लिए तैयार करना है। ……………………… पेरेंटिंग की ये खबर भी पढ़िए पेरेंटिंग- 10 साल का बेटा पैसे की कीमत नहीं समझता: दोस्तों को देखकर महंगे कपड़े-खिलौने मांगता है, उसे पैसे की वैल्यू कैसे सिखाएं दरअसल 8-10 साल की उम्र में बच्चे पैसे की वैल्यू नहीं समझते। उन्हें सिर्फ इतना पता होता है कि जो चीज उन्हें पसंद है, वह उनके पास होनी चाहिए। उन्हें यह समझ नहीं होती कि पैसे कहां से आते हैं, कैसे कमाए जाते हैं या बजट कैसे बनाया जाता है। पूरी खबर पढ़िए…
प्रसंग
यह खबर "पेरेंटिंग- 10 साल का बेटा कोई काम खुद नहीं करता:चाहता है, सबकुछ कोई और करके दे, उसे घर के काम करना, जिम्मेदार होना कैसे सिखाएं?" से जुड़ी है। अब तक जो जानकारी सामने आई है, उसका सार है: सवाल- मैं पटना से हूं। मेरा 10 साल का बेटा है। मैंने नोटिस किया है कि वह अपने छोटे-छोटे काम भी खुद नहीं करता। पानी चाहिए तो किसी को बुलाएगा, स्कूल बैग लगाना हो तो मेरी मदद मांगेगा। मैं उसे अपने कामों से लेकर घर के छोटे-छोटे काम सिखाना चाहती हूं। लेकिन मैं जब भी उसे कोई काम बोलती
ऐसी खबरों में शुरुआती अपडेट और अंतिम तस्वीर के बीच अक्सर कुछ अंतर होता है। पाठकों के लिए मुख्य घटना, उसका असर और आगे आने वाले अपडेट को अलग-अलग समझना मददगार रहता है।
अपराध, अदालत, राजनीति, स्वास्थ्य या वित्त जैसे संवेदनशील विषयों में स्थिति समय के साथ बदल सकती है, इसलिए इस पर आगे भी अपडेट दिया जाएगा।
पाठकों पर असर
पाठकों के लिए यह खबर इसलिए अहम है क्योंकि यह तेजी से बदलते घटनाक्रम का संक्षिप्त, स्रोत-आधारित और साफ संदर्भ देती है।
NewzQuest दृष्टिकोण
NewzQuest की नजर में यह एक शुरुआती लेकिन महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, जिस पर आने वाले समय में और स्पष्टता आने की उम्मीद है।
आगे क्या देखना है
- इस मुद्दे पर आने वाला अगला आधिकारिक बयान।
- इसका आम लोगों और स्थानीय समुदाय पर पड़ने वाला असर।
- आने वाले दिनों में सामने आने वाले नए घटनाक्रम।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
यह अपडेट पाठकों के लिए इसलिए अहम है क्योंकि यह तेजी से बदलती खबर पर शुरुआती संदर्भ देता है।
NewzQuest सटीक और जिम्मेदार रिपोर्टिंग के लिए प्रतिबद्ध है। अगर आपको इस खबर में कोई त्रुटि नजर आती है, तो कृपया हमें सूचित करें।
आगे क्या
NewzQuest इस विषय पर आने वाले हर नए अपडेट को ट्रैक करता रहेगा।
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