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पश्चिम बंगाल में BJP पर भारी पड़ सकता है SIR, मतुआ समुदाय में डर का माहौल!
भारत आने वालों में हिन्दू और मुसलमान, दोनों थे और दोनों ही ‘शरणार्थी’ थे, जिनके पास न घर थे और न उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी थी। राजनीतिक दलों ने ऐसे लोगों को राशन कार्ड देकर उन्हें अपने पैर जमाने में मदद की और ये लोग धीरे-धीरे समाज में घुलते-मिलते चले गए।
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