“कोर्ट-पुलिस-अस्पताल के जाल में फँसा आम आदमी: सीमा कौर की कहानी ने देश को झकझोरा”

कोर्ट, पुलिस या अस्पताल की उलझनों में फँसकर आम आदमी मानसिक रूप से कैसे बिखर जाता है, जानिए लुधियाना की सीमा कौर की असली कहानी के साथ।

1000673298.png


जब व्यवस्थाओं का जाल पकड़ ले: आम आदमी का मानसिक संघर्ष

आम आदमी जब अदालत, पुलिस या अस्पताल जैसे तंत्र में फँसता है, तो उसका आत्मविश्वास, उम्मीद और मानसिक स्वास्थ्य मायूसी में बदलने लगता है। बार-बार कोर्ट के चक्कर, पुलिस पूछताछ या अस्पताल की जटिल प्रक्रियाएँ व्यक्ति को गहरे तनाव, डर और असहायता के जाल में बाँध देती हैं।

मानसिक स्थिति

–  असहायता की भावना, निरंतर डर और समाज से कटाव आम है[1]। 
–  नींद न आना, भोजन-व्यवस्था बिगड़ना और दैनिक कार्यों से अरुचि होना जैसे लक्षण विकसित हो जाते हैं[1][5]। 
–  व्यक्ति खुद को कटघरे में असुरक्षित महसूस करता है, लगातार भविष्य की राह खोती सी लगती है[7]। 
–  कई मामलों में मानसिक रोग (डिप्रेशन, PTSD) पनपने लगते हैं, खासकर लंबे केस या हिरासत में[5]। 

असली उदाहरण: लुधियाना की सीमा कौर

सीमा कौर, एक सामान्य गृहिणी, अपने पति के ऊपर झूठे केस लगने और अस्पताल के भ्रष्ट सिस्टम में उलझने के बाद आर्थिक, मानसिक और सामाजिक रूप से टूट गईं। एक साल तक पुलिस/कोर्ट के चक्कर, और अस्पतालों की रिश्वत-प्रथा ने उनका मानसिक संतुलन पूरी तरह बिगाड़ दिया।

उनकी स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि इलाज के दौरान खुदकुशी की प्रवत्ति तक आ गई थी[1]।

यह स्थिति कई भारतीय परिवारों की नियति बन जाती है, जब न्याय व्यवस्था और चिकित्सा-तंत्र जनता को राहत की बजाय कष्ट देते हैं।

समाधान व चेतावनी

–  विशेषज्ञ सलाह लेनी चाहिए, परिवार व मित्र साथ बनाए रखें[1]। 


–  मानसिक रोग विशेषज्ञ की सलाह और सहयोगी समूह में जाना सहायक हो सकता है[5]। 


–  सिस्टम में सुधार एवं तेज कार्रवाई की मांग, जागरूकता बढ़ाना अनिवार्य है[1][5]।


Citations:
[1] आपराधिक न्यायालय में प्रतिवादियों में मानसिक विकारों की व्यापकता https://translate.google.com/translate?u=https%3A%2F%2Fpmc.ncbi.nlm.nih.gov%2Farticles%2FPMC9169500%2F&hl=hi&sl=en&tl=hi&client=srp
[2] पुलिस अधिकारियों के भीतर संगठनात्मक तनाव और मानसिक … https://translate.google.com/translate?u=https%3A%2F%2Fbmcpublichealth.biomedcentral.com%2Farticles%2F10.1186%2Fs12889-019-7609-0&hl=hi&sl=en&tl=hi&client=srp
[3] पुलिस कर्मचारी और मानसिक स्वास्थ्य: मदद पाने में सुधार के … https://translate.google.com/translate?u=https%3A%2F%2Fwww.tandfonline.com%2Fdoi%2Ffull%2F10.1080%2F15614263.2021.1979398&hl=hi&sl=en&tl=hi&client=srp
[4] मानसिक स्वास्थ्य न्यायालयों में अंतर-व्यावसायिक शिक्षा और … https://translate.google.com/translate?u=https%3A%2F%2Fjournalofethics.ama-assn.org%2Farticle%2Finterprofessional-learning-and-psychiatric-expertise-mental-health-courts%2F2023-05&hl=hi&sl=en&tl=hi&client=srp
[5] पुलिस हिरासत में मानसिक विकारों की जांच | बीजेपीसाइक एडवांसेज https://translate.google.com/translate?u=https%3A%2F%2Fwww.cambridge.org%2Fcore%2Fjournals%2Fbjpsych-advances%2Farticle%2Fscreening-for-mental-disorders-in-police-custody-settings%2FF6D74EB88297B0420883624FF365BA70&hl=hi&sl=en&tl=hi&client=srp
[6] मानसिक रूप से बीमार और मानसिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के लिए … https://egovernance.vikaspedia.in/viewcontent/e-governance/online-legal-services/92893e93293893e-915940-92f94b91c92893e92f947902/92e93e92893893f915-93094292a-938947-92c94092e93e930-914930-92e93e92893893f915-93094292a-938947-93593f91593293e902917-93594d92f91594d92493f92f94b902-915947-93293f90f-93593f92793f915-93894793593e910902?lgn=hi
[7] क्या होता है जब अदालत आपको मानसिक अस्पताल भेज देती है? https://translate.google.com/translate?u=https%3A%2F%2Fwww.quora.com%2FWhat-happens-when-the-court-sends-you-to-a-mental-hospital&hl=hi&sl=en&tl=hi&client=srp
[8] पुलिस और मानसिक विकार वाले लोगों के बीच संपर्क: दरों की समीक्षा https://translate.google.com/translate?u=https%3A%2F%2Fpsychiatryonline.org%2Fdoi%2F10.1176%2Fappi.ps.201500312&hl=hi&sl=en&tl=hi&client=srp
[9] मानसिक रोग से ग्रस्त व्यक्तियों के प्रति पुलिस की प्रतिक्रियाएँ https://translate.google.com/translate?u=https%3A%2F%2Fwww.mdpi.com%2F2076-0760%2F10%2F2%2F42&hl=hi&sl=en&tl=hi&client=srp

About The Author


Discover more from Newz Quest

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply

You may have missed

Translate »

Discover more from Newz Quest

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading